Chapter 1
पद – सूरदास
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कवि परिचय — सूरदास
सूरदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कृष्णभक्त कवि हैं। वे सगुण भक्ति की कृष्णभक्ति शाखा के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, गोपियों के प्रेम, वात्सल्य तथा विरह का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन मिलता है।
उनकी भाषा मुख्यतः ब्रजभाषा है। उनकी प्रमुख रचना ‘सूरसागर’ मानी जाती है।
परीक्षा के लिए याद रखें
- कवि — सूरदास
- काल — भक्तिकाल
- भक्ति धारा — कृष्णभक्ति शाखा
- भाषा — ब्रजभाषा
- प्रमुख रचना — सूरसागर
- आराध्य — श्रीकृष्ण
- प्रमुख भाव — कृष्ण-भक्ति, प्रेम और विरह
2. पाठ की पृष्ठभूमि
प्रस्तुत पदों में श्रीकृष्ण मथुरा चले जाने के बाद ब्रज की गोपियों की विरह-वेदना का वर्णन है।
कृष्ण स्वयं ब्रज वापस आने के स्थान पर अपने मित्र उद्धव को गोपियों के पास भेजते हैं। उद्धव गोपियों को कृष्ण का संदेश देते हुए योग और निर्गुण ब्रह्म का उपदेश देते हैं।
लेकिन गोपियाँ कृष्ण से अनन्य प्रेम करती हैं। उनके लिए कृष्ण केवल ईश्वर नहीं बल्कि उनके जीवन का आधार हैं। इसलिए उद्धव का ज्ञान और योग का संदेश उन्हें स्वीकार नहीं होता।
यहीं से गोपियों और उद्धव के बीच संवाद के माध्यम से प्रेम-भक्ति की श्रेष्ठता सामने आती है।
3. प्रथम पद का भाव
गोपियाँ उद्धव पर व्यंग्य करते हुए उन्हें बहुत भाग्यशाली कहती हैं क्योंकि कृष्ण के इतने निकट रहने के बाद भी वे कृष्ण के प्रेम में नहीं पड़े।
गोपियाँ उद्धव की तुलना कमल के पत्ते से करती हैं। कमल का पत्ता पानी में रहता है लेकिन पानी से प्रभावित नहीं होता।
इसी प्रकार उद्धव श्रीकृष्ण के निकट रहते हुए भी उनके प्रेम से प्रभावित नहीं हुए।
उनकी तुलना तेल लगी गागर से भी की गई है, जिस पर पानी की बूँदें टिकती नहीं हैं।
इसके विपरीत गोपियाँ कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह डूब चुकी हैं।
मुख्य भाव
उद्धव = ज्ञान और योग
गोपियाँ = प्रेम और भक्ति
कवि प्रेम-भक्ति को शुष्क ज्ञान और योग से अधिक प्रभावशाली दिखाते हैं।
4. दूसरे पद…
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