Chapter 8

Aldehydes, Ketones and Carboxylic Acids

  • BoardJAC
  • Class12th (SCI.)
  • SubjectChemistry
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ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक एसिड

1. कार्बोनिल यौगिक (Carbonyl Compounds)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बोनिल समूह (>C=O) उपस्थित होता है, कार्बोनिल यौगिक कहलाते हैं।

इस अध्याय में मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण वर्गों का अध्ययन किया गया है:

ऐल्डिहाइड (Aldehydes)

ऐल्डिहाइड में कार्बोनिल कार्बन कम-से-कम एक हाइड्रोजन परमाणु से जुड़ा होता है।

सामान्य सूत्र: R–CHO

उदाहरण:

  • HCHO — Methanal (Formaldehyde)
  • CH₃CHO — Ethanal (Acetaldehyde)
  • CH₃CH₂CHO — Propanal

कीटोन (Ketones)

कीटोन में कार्बोनिल कार्बन दो कार्बन/ऐल्किल समूहों से जुड़ा होता है।

सामान्य सूत्र: R–CO–R′

कीटोन दो प्रकार के हो सकते हैं:

  • सममित कीटोन (Symmetrical Ketones): कार्बोनिल समूह के दोनों ओर समान समूह उपस्थित होते हैं।
  • असममित कीटोन (Unsymmetrical Ketones): कार्बोनिल समूह के दोनों ओर अलग-अलग समूह उपस्थित होते हैं।

उदाहरण:

CH₃COCH₃ — Propanone (Acetone)

2. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन का नामकरण (Nomenclature)

ऐल्डिहाइड

ऐल्डिहाइड के IUPAC नामकरण में –al प्रत्यय (Suffix) का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण:

  • HCHO → Methanal
  • CH₃CHO → Ethanal
  • CH₃CH₂CHO → Propanal

कीटोन

कीटोन के IUPAC नामकरण में –one प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण:

CH₃COCH₃ → Propanone

जब किसी यौगिक में एक से अधिक क्रियात्मक समूह (Functional Groups) उपस्थित हों, तो नामकरण करते समय क्रियात्मक समूहों की प्राथमिकता (Priority) को ध्यान में रखा जाता है।

3. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन का निर्माण

3.1 ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण द्वारा

प्राथमिक ऐल्कोहॉल (Primary Alcohol) का नियंत्रित ऑक्सीकरण करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है।

R–CH₂OH →[PCC/PDC] R–CHO

द्वितीयक ऐल्कोहॉल (Secondary Alcohol) का ऑक्सीकरण करने पर कीटोन प्राप्त होता है।

R–CH(OH)–R′ →[PCC/PDC] R–CO–R′

3.2 ऐल्कोहॉल का उत्प्रेरकीय डिहाइड्रोजनीकरण (Catalytic Dehydrogenation)

ऐल्कोहॉल की वाष्प को गर्म कॉपर के ऊपर से प्रवाहित करने पर डिहाइड्रोजनीकरण होता है।

प्राथमिक ऐल्कोहॉल:

R–CH₂OH →[Cu/Δ] R–CHO

द्वितीयक ऐल्कोहॉल:

R–CH(OH)–R′ →[Cu/Δ] R–CO–R′

4. ऐल्कीन से निर्माण – अपचायक ओजोनोलिसिस (Reductive Ozonolysis)

ऐल्कीन का ओजोनोलिसिस और उसके बाद अपचायक प्रक्रिया (Reductive Work-up) करने पर ऐल्कीन की संरचना के अनुसार ऐल्डिहाइड और/या कीटोन प्राप्त होते हैं।

अभिकर्मक (Reagent):

O₃/Zn/H₂O

PDF में DMS का उपयोग करके अपचायक प्रक्रिया भी दिखाई गई है।

उदाहरण:

CH₃–CH=C(CH₃)₂ → CH₃CHO + CH₃COCH₃

ओजोनोलिसिस का उपयोग कार्बोनिल यौगिकों के निर्माण के साथ-साथ ऐल्कीन की संरचना निर्धारित करने में भी किया जाता है।

5. ऐल्काइन से निर्माण

5.1 ऐल्काइन का जलयोजन (Hydration)

ऐल्काइन का निम्न अभिकर्मकों की उपस्थिति में जलयोजन होता है:

HgSO₄/H₂SO₄/H₂O

इस अभिक्रिया में पहले एक इनॉल (Enol) बनता है, जो बाद में संबंधित कार्बोनिल यौगिक में बदल जाता है।

टर्मिनल ऐल्काइन के लिए:

R–C≡CH → R–CO–CH₃

उदाहरण:

HC≡CH → CH₃CHO

PDF में दी गई जलयोजन की परिस्थितियों में फेनिलएसीटिलीन (Phenylacetylene) से एसीटोफीनोन (Acetophenone) प्राप्त होता है।

5.2 ऐल्काइन का हाइड्रोबोरेशन–ऑक्सीकरण (Hydroboration–Oxidation)

अभिकर्मक:

  1. BH₃/THF
  2. H₂O₂/OH⁻

टर्मिनल ऐल्काइन के लिए:

R–C≡CH → R–CH₂–CHO

उदाहरण:

CH₃–C≡CH → CH₃CH₂CHO

6. जेम-डाइहैलाइड (Gem-Dihalides) से निर्माण

जेम-डाइहैलाइड का जलीय KOH के साथ हाइड्रोलिसिस होता है।

R–CHCl₂ →[aq. KOH] R–CH(OH)₂ → R–CHO + H₂O

उदाहरण:

CH₃CHCl₂ → CH₃CHO

7. कैल्शियम लवणों का शुष्क आसवन (Dry Distillation)

कार्बोक्सिलिक एसिड के कैल्शियम लवण का शुष्क आसवन करने पर कीटोन बन सकता है।

(RCOO)₂Ca →[Dry distillation] R–CO–R + CaCO₃

PDF में एसीटोन तथा बेंज़ोफीनोन-प्रकार के उत्पादों के निर्माण के उदाहरण दिए गए हैं और कुछ विशेष स्थितियों की भी चर्चा की गई है।

8. ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक (Grignard Reagent) द्वारा निर्माण

8.1 HCN के साथ ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक

ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक की HCN के साथ अभिक्रिया और उसके बाद हाइड्रोलिसिस करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है।

RMgX + HCN → Intermediate →[H₃O⁺] R–CHO

8.2 फॉर्मेट एस्टर के साथ ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक

फॉर्मेट एस्टर ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करता है और हाइड्रोलिसिस के बाद ऐल्डिहाइड देता है।

8.3 ऐल्किल सायनाइड के साथ ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक

ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक ऐल्किल सायनाइड के साथ अभिक्रिया करता है और उसके बाद हाइड्रोलिसिस करने पर कीटोन प्राप्त होता है।

RMgX + R′–CN →[H₃O⁺] R–CO–R′

9. रोज़ेनमंड अपचयन (Rosenmund Reduction)

रोज़ेनमंड अपचयन का उपयोग एसिड क्लोराइड से ऐल्डिहाइड बनाने के लिए किया जाता है।

R–COCl →[H₂/Pd/BaSO₄] R–CHO

अभिकर्मक: H₂/Pd/BaSO₄

महत्वपूर्ण: इस विधि द्वारा कीटोन नहीं बनाए जा सकते।

10. स्टीफन अपचयन (Stephen Reduction)

नाइट्राइल को SnCl₂/HCl का उपयोग करके और उसके बाद हाइड्रोलिसिस द्वारा ऐल्डिहाइड में परिवर्तित किया जाता है।

R–C≡N →[SnCl₂/HCl] Imine intermediate →[H₃O⁺] R–CHO

उदाहरण:

CH₃CN → CH₃CHO

PDF में दिखाए अनुसार यह रूपांतरण ऐरोमैटिक नाइट्राइल पर भी लागू होता है।

11. DIBAL-H अपचयन

DIBAL-H का पूरा नाम diisobutyl aluminium hydride है।

PDF में इसका उपयोग उपयुक्त नाइट्राइल तथा कार्बोक्सिलिक एसिड के व्युत्पन्नों (Derivatives) को ऐल्डिहाइड में बदलने के लिए किया गया है।

R–C≡N →[1. DIBAL-H, 2. H₃O⁺] R–CHO

PDF में DIBAL-H द्वारा एस्टर → ऐल्डिहाइड रूपांतरण भी दिखाया गया है।

12. बेंज़ैल्डिहाइड का निर्माण

12.1 क्रोमिल क्लोराइड द्वारा टॉलूईन से

टॉलूईन क्रोमिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके एक मध्यवर्ती क्रोमियम संकुल (Intermediate Chromium Complex) बनाता है, जो हाइड्रोलिसिस के बाद बेंज़ैल्डिहाइड देता है।

C₆H₅CH₃ →[CrO₂Cl₂] Complex →[H₃O⁺] C₆H₅CHO

12.2 साइड-चेन हैलोजनीकरण (Side-Chain Halogenation) द्वारा

टॉलूईन का साइड-चेन क्लोरीनीकरण और उसके बाद हाइड्रोलिसिस करने पर बेंज़ैल्डिहाइड प्राप्त होता है।

12.3 गैटरमैन–कोख अभिक्रिया (Gattermann–Koch Reaction)

बेंजीन, AlCl₃/CuCl की उपस्थिति में कार्बन मोनोऑक्साइड तथा HCl के साथ अभिक्रिया करके बेंज़ैल्डिहाइड बनाता है।

C₆H₆ + CO + HCl →[AlCl₃/CuCl] C₆H₅CHO

13. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन के भौतिक गुण

भौतिक अवस्था (Physical State)

  • HCHO — गैस
  • निम्न सदस्य (Lower Members) — द्रव
  • उच्च सदस्य (Higher Members) — ठोस

विलेयता (Solubility)

HCHO, CH₃CHO तथा CH₃COCH₃ जैसे निम्न ऐल्डिहाइड और कीटोन ध्रुवीय कार्बोनिल समूह के कारण जल में विलेय होते हैं।

आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर विलेयता कम होती जाती है।

क्वथनांक (Boiling Point)

PDF में दिया गया सामान्य क्रम:

Alcohol > Aldehyde/Ketone > Ether > Hydrocarbon

हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding) के कारण ऐल्कोहॉल में अंतराआण्विक आकर्षण अधिक मजबूत होता है।

14. नाभिकस्नेही योग अभिक्रिया (Nucleophilic Addition Reaction)

नाभिकस्नेही योग ऐल्डिहाइड और कीटोन की प्रमुख अभिक्रियाओं में से एक है।

कार्बोनिल बंध ध्रुवीय होता है:

Cδ+=Oδ−

इसलिए नाभिकस्नेही (Nucleophile) धनात्मक रूप से ध्रुवित कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करता है।

>C=O + Nu⁻ → >C(O⁻)(Nu) → Addition product

PDF में नाभिकस्नेही आक्रमण को क्रियाविधि का महत्वपूर्ण धीमा/दर-निर्धारक चरण (Rate-Determining Step) माना गया है।

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