Chapter 9

Amines

  • BoardJAC
  • Class12th (SCI.)
  • SubjectChemistry
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ऐमीन (Amines)

1. परिचय

ऐमीन, अमोनिया (NH₃) के कार्बनिक व्युत्पन्न होते हैं, जिनमें अमोनिया के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल या ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।

प्रतिस्थापित हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत किया जाता है।

2. ऐमीनों का वर्गीकरण

2.1 प्राथमिक (1°) ऐमीन

जब NH₃ के एक हाइड्रोजन परमाणु को ऐल्किल या ऐरिल समूह द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है, तो प्राथमिक ऐमीन बनता है।

सामान्य सूत्र: R–NH₂

उदाहरण:

  • CH₃NH₂ — Methylamine
  • C₂H₅NH₂ — Ethylamine
  • C₆H₅NH₂ — Aniline

2.2 द्वितीयक (2°) ऐमीन

जब NH₃ के दो हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल या ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है, तो द्वितीयक ऐमीन बनता है।

सामान्य सूत्र: R₂NH

उदाहरण:

(CH₃)₂NH — Dimethylamine

2.3 तृतीयक (3°) ऐमीन

जब NH₃ के तीनों हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल या ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, तो तृतीयक ऐमीन बनता है।

सामान्य सूत्र: R₃N

उदाहरण:

(CH₃)₃N — Trimethylamine

3. ऐमीनों का नामकरण

सामान्य नामकरण (Common Nomenclature)

सामान्य नामकरण में नाइट्रोजन से जुड़े ऐल्किल या ऐरिल समूह का नाम लिखने के बाद amine शब्द जोड़ा जाता है।

उदाहरण:

  • CH₃NH₂ → Methylamine
  • C₂H₅NH₂ → Ethylamine
  • (CH₃)₂NH → Dimethylamine
  • (C₂H₅)₂NH → Diethylamine

IUPAC नामकरण

IUPAC नामकरण में –amine प्रत्यय (Suffix) का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण:

  • CH₃NH₂ → Methanamine
  • CH₃CH₂NH₂ → Ethanamine
  • CH₃CH₂CH₂NH₂ → Propan-1-amine

द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में नाइट्रोजन से सीधे जुड़े समूहों को दर्शाने के लिए N- का प्रयोग किया जाता है।

4. ऐमीनों का निर्माण

4.1 नाइट्रो यौगिकों का अपचयन (Reduction of Nitro Compounds)

नाइट्रो यौगिकों का अपचयन करने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होते हैं।

R–NO₂ →[Reduction] R–NH₂

दिए गए प्रमुख अपचायक (Reducing Agents):

  • H₂/Ni
  • Sn/HCl
  • Fe/HCl

नाइट्रोबेंजीन के लिए:

C₆H₅NO₂ →[Sn/HCl] C₆H₅NH₂

उत्पाद: Aniline

4.2 ऐल्किल हैलाइड का अमोनीकरण (Ammonolysis of Alkyl Halides)

ऐल्किल हैलाइड अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके ऐमीन बनाते हैं।

RX + NH₃ → RNH₂

बना हुआ प्राथमिक ऐमीन आगे ऐल्किल हैलाइड के साथ अभिक्रिया कर सकता है।

RNH₂ + RX → R₂NH

R₂NH + RX → R₃N

R₃N + RX → R₄N⁺X⁻

इसलिए अमोनीकरण से निम्न का मिश्रण प्राप्त हो सकता है:

  • प्राथमिक ऐमीन (Primary Amine)
  • द्वितीयक ऐमीन (Secondary Amine)
  • तृतीयक ऐमीन (Tertiary Amine)
  • चतुष्क अमोनियम लवण (Quaternary Ammonium Salt)

अमोनिया की अधिक मात्रा प्राथमिक ऐमीन के निर्माण को बढ़ावा देती है।

4.3 ऐल्कोहॉल से निर्माण

उपयुक्त परिस्थितियों में ऐल्कोहॉल अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके ऐमीन बनाते हैं।

R–OH + NH₃ → R–NH₂ + H₂O

यह अभिक्रिया उच्च तापमान पर उपयुक्त उत्प्रेरक (Catalyst) की उपस्थिति में कराई जाती है।

4.4 नाइट्राइल का अपचयन

नाइट्राइल का अपचयन करने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है।

R–C≡N →[Reduction] R–CH₂NH₂

प्रमुख अपचायक:

LiAlH₄ या H₂/Ni

इस अभिक्रिया में ऐल्किल समूह R की तुलना में कार्बन श्रृंखला में एक कार्बन परमाणु की वृद्धि होती है।

4.5 एमाइड का अपचयन

LiAlH₄ का उपयोग करके एमाइड का अपचयन करने पर ऐमीन प्राप्त होता है।

R–CONH₂ →[LiAlH₄] R–CH₂NH₂

कार्बोनिल समूह का कार्बन परमाणु उत्पाद में बना रहता है।

5. हॉफमैन ब्रोमामाइड अपघटन अभिक्रिया (Hofmann Bromamide Degradation Reaction)

एमाइड की ब्रोमीन और क्षार के साथ अभिक्रिया कराने पर ऐसा प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है जिसमें मूल एमाइड की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम होता है।

RCONH₂ + Br₂ + 4KOH → RNH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O

इस अभिक्रिया को हॉफमैन ब्रोमामाइड अपघटन अभिक्रिया (Hofmann Bromamide Degradation Reaction) कहते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु:

Amide → एक कार्बन परमाणु कम वाला Primary Amine

उदाहरण:

CH₃CONH₂ →[Br₂/KOH] CH₃NH₂

हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया की क्रियाविधि (Mechanism)

इस अभिक्रिया में एमाइड का ब्रोमिनेशन, पुनर्विन्यास (Rearrangement) और हाइड्रोलिसिस क्रमिक चरणों में होता है।

पुनर्विन्यास के दौरान बनने वाला महत्वपूर्ण मध्यवर्ती आइसोसाइनेट (Isocyanate) है।

सामान्य क्रम:

RCONH₂ → N-bromoamide → Isocyanate → Carbamic acid → RNH₂ + CO₂

6. गेब्रियल फ्थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis)

गेब्रियल फ्थैलिमाइड संश्लेषण का उपयोग प्राथमिक ऐमीन बनाने के लिए किया जाता है।

सबसे पहले फ्थैलिमाइड KOH के साथ अभिक्रिया करके पोटैशियम फ्थैलिमाइड बनाता है।

Phthalimide + KOH → Potassium phthalimide

पोटैशियम फ्थैलिमाइड, ऐल्किल हैलाइड के साथ अभिक्रिया करता है:

Potassium phthalimide + R–X → N-Alkyl phthalimide

हाइड्रोलिसिस करने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है:

N-Alkyl phthalimide →[Hydrolysis] R–NH₂

महत्वपूर्ण: यह विधि प्राथमिक ऐमीन बनाने के लिए उपयोगी है।

7. ऐमीनों के भौतिक गुण

भौतिक अवस्था (Physical State)

निम्न ऐमीन सामान्यतः गैस या वाष्पशील द्रव होते हैं, जबकि उच्च ऐमीन द्रव या ठोस होते हैं।

हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding)

प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीनों में N–H बंध होता है, इसलिए ये अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध (Intermolecular Hydrogen Bonds) बना सकते हैं।

तृतीयक ऐमीनों में N–H बंध नहीं होता, इसलिए इनके अपने अणुओं के बीच उसी प्रकार अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध नहीं बनता।

क्वथनांक (Boiling Point)

समावयवी ऐमीनों (Isomeric Amines) के क्वथनांक पर हाइड्रोजन बंधन का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

सामान्य क्रम:

1° amine > 2° amine > 3° amine

यह क्रम अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंधन की मात्रा कम होने के कारण होता है।

जल में विलेयता

निम्न ऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं, इसलिए वे जल में विलेय होते हैं।

हाइड्रोकार्बन समूह का आकार बढ़ने के साथ जल में विलेयता कम होती जाती है।

8. ऐमीनों की क्षारीय प्रकृति (Basic Nature)

ऐमीन क्षारीय होते हैं क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों का एकाकी युग्म (Lone Pair of Electrons) उपस्थित होता है, जो एक प्रोटॉन को ग्रहण कर सकता है।

RNH₂ + H⁺ → RNH₃⁺

इसलिए ऐमीन लुईस क्षार (Lewis Bases) तथा प्रोटॉन ग्राही (Proton Acceptors), दोनों के रूप में कार्य करते हैं।

9. ऐमीनों की क्षारीय शक्ति (Basic Strength)

किसी ऐमीन की क्षारीय शक्ति नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

ऐल्किल समूहों का प्रभाव

ऐल्किल समूह +I प्रभाव दिखाते हैं और नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं।

इसलिए ऐल्किल ऐमीन सामान्यतः अमोनिया की तुलना में अधिक प्रबल क्षार होते हैं।

स्रोत में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों की क्षारीय शक्ति के साथ-साथ जलीय माध्यम (Aqueous Medium) के प्रभाव की भी चर्चा की गई है।

ऐलिफैटिक एवं ऐरोमैटिक ऐमीन

ऐलिफैटिक ऐमीन सामान्यतः ऐनिलीन जैसे ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में अधिक क्षारीय होते हैं।

ऐनिलीन में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद (Resonance) में भाग लेता है।

इसके कारण एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए कम उपलब्ध रहता है।

अतः:

Aliphatic amines are more basic than aniline.

10. ऐमीनों की अम्लों के साथ अभिक्रिया

ऐमीन अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण बनाते हैं।

RNH₂ + HCl → RNH₃⁺Cl⁻

उदाहरण:

CH₃NH₂ + HCl → CH₃NH₃Cl

ऐनिलीन भी HCl के साथ अभिक्रिया करती है:

C₆H₅NH₂ + HCl → C₆H₅NH₃⁺Cl⁻

11. ऐमीनों का ऐसिलीकरण (Acylation)

प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीन, एसिड क्लोराइड या एसिड एनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया करके एमाइड बनाते हैं।

प्राथमिक ऐमीन के लिए:

RNH₂ + R′COCl → R′CONHR + HCl

द्वितीयक ऐमीन के लिए:

R₂NH + R′COCl → R′CONR₂ + HCl

तृतीयक ऐमीन इस प्रकार ऐसिलीकरण अभिक्रिया नहीं देते, क्योंकि उनके नाइट्रोजन पर प्रतिस्थापित होने योग्य हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता है।

12. नाइट्रस एसिड के साथ अभिक्रिया

नाइट्रस एसिड निम्न अभिक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है:

NaNO₂ + HCl → HNO₂ + NaCl

प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन नाइट्रस एसिड के साथ अलग-अलग व्यवहार करते हैं।

12.1 प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन

प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन नाइट्रस एसिड के साथ अभिक्रिया करके अस्थायी ऐलिफैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं, जो विघटित होकर नाइट्रोजन गैस निकालते हैं।

RNH₂ + HNO₂ → ROH + N₂↑ + H₂O

12.2 प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन

प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन कम तापमान पर नाइट्रस एसिड के साथ अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं।

ऐनिलीन के लिए:

C₆H₅NH₂ + NaNO₂ + 2HCl →[0–5°C] C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + NaCl + 2H₂O

उत्पाद: Benzene diazonium chloride

12.3 द्वितीयक ऐमीन

द्वितीयक ऐमीन नाइट्रस एसिड के साथ अभिक्रिया करके N-नाइट्रोसोऐमीन (N-Nitrosoamines) बनाते हैं।

R₂NH + HNO₂ → R₂N–N=O + H₂O

13. 1°, 2° और 3° ऐमीनों में अंतर – हिन्सबर्ग परीक्षण (Hinsberg Test)

हिन्सबर्ग परीक्षण का उपयोग प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में अंतर करने के लिए किया जाता है।

इसमें प्रयुक्त अभिकर्मक बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड (C₆H₅SO₂Cl) है, जिसका उपयोग क्षार की उपस्थिति में किया जाता है।

प्राथमिक ऐमीन

प्राथमिक ऐमीन हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके ऐसा सल्फोनामाइड बनाता है जिसमें एक अम्लीय हाइड्रोजन उपस्थित होता है।

यह उत्पाद क्षार में विलेय होता है।

अम्लीकरण (Acidification) करने पर सल्फोनामाइड अवक्षेपित हो जाता है।

द्वितीयक ऐमीन

द्वितीयक ऐमीन N,N-disubstituted sulphonamide बनाता है।

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