Chapter 2
Human Reproduction
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मानव जनन (Human Reproduction)
जनन (Reproduction) जीवित जीवों की वह क्षमता है, जिसके द्वारा वे अपने समान नई पीढ़ी के जीवों को उत्पन्न करते हैं।
मनुष्य में जनन संबंधी प्रमुख घटनाएँ
- युग्मकजनन (Gametogenesis)
- वीर्यसेचन (Insemination)
- निषेचन (Fertilisation)
- आरोपण (Implantation)
- गर्भावस्था (Gestation)
- प्रसव (Parturition)
- नर में शुक्राणु और मादा में अंडाणु जैसे युग्मकों के निर्माण को युग्मकजनन (Gametogenesis) कहते हैं।
- शुक्राणुओं को मादा जनन मार्ग में पहुँचाने की प्रक्रिया को वीर्यसेचन (Insemination) कहते हैं।
- नर और मादा युग्मकों के संलयन को निषेचन (Fertilisation) कहते हैं।
- ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst) के निर्माण, विकास और गर्भाशय की भित्ति से जुड़ने की प्रक्रिया को आरोपण (Implantation) कहते हैं।
- भ्रूण के विकास की अवधि को गर्भावस्था (Gestation) कहते हैं।
- शिशु के जन्म की प्रक्रिया को प्रसव (Parturition) कहते हैं।
यौवनारंभ (Puberty)
यौवनारंभ (Puberty) वह अवस्था है जब कोई व्यक्ति लैंगिक रूप से जनन करने में सक्षम हो जाता है। यह हार्मोनों और वृषण तथा अंडाशय जैसे जनन अंगों के परिपक्व होने के कारण होता है।
- दिए गए नोट्स के अनुसार, सामान्यतः लड़कों में लगभग 14 वर्ष और लड़कियों में लगभग 12 वर्ष की आयु में यौवनारंभ होता है।
- यौवनारंभ के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तन हार्मोनों के कारण होते हैं।
- हार्मोन शरीर में बनने वाले रासायनिक पदार्थ हैं।
लड़कियों में यौवनारंभ के दौरान होने वाले परिवर्तन
- यौवनारंभ के दौरान मादा शरीर में एस्ट्रोजन (Oestrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) जैसे हार्मोन बनते हैं।
- एस्ट्रोजन स्तनों के विकास में सहायता करता है।
- एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) को नियंत्रित करते हैं।
- बगल और जननांग क्षेत्र में बाल उगने लगते हैं।
- आवाज में भी परिवर्तन होता है।
लड़कों में यौवनारंभ के दौरान होने वाले परिवर्तन
- टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) प्रमुख नर लैंगिक हार्मोन है।
- इसका निर्माण वृषण (Testes) में होता है।
- टेस्टोस्टेरोन शुक्राणुओं के निर्माण की शुरुआत करता है।
- इसके कारण छाती और कंधे चौड़े होने लगते हैं।
- यह चेहरे पर बालों के विकास का भी कारण बनता है।
नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)
नर जनन तंत्र में प्राथमिक जनन अंग, सहायक नलिकाएँ, सहायक ग्रंथियाँ और बाह्य जननांग शामिल होते हैं।
प्राथमिक जनन अंग – वृषण (Testes)
- वृषण पुरुष के प्राथमिक जनन अंग हैं।
- वृषण वह स्थान है जहाँ नर युग्मक अर्थात शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
- वृषण उदर गुहा के बाहर एक थैलीनुमा संरचना में स्थित होते हैं, जिसे अंडकोश (Scrotum) कहते हैं।
- वयस्क व्यक्ति में प्रत्येक वृषण अंडाकार होता है और इसकी लंबाई लगभग 4–5 सेमी तथा चौड़ाई लगभग 2–3 सेमी होती है।
- वृषण का सबसे बाहरी आवरण एक सघन रेशेदार झिल्ली है, जिसे ट्यूनिका एल्बुजिनिया (Tunica Albuginea) कहते हैं।
- प्रत्येक वृषण में लगभग 200–300 खंड होते हैं, जिन्हें वृषण पालिकाएँ (Testicular Lobules) कहते हैं।
- इन पालिकाओं में अत्यधिक कुंडलित नलिकाएँ होती हैं, जिन्हें शुक्रजनक नलिकाएँ (Seminiferous Tubules) कहते हैं।
- प्रत्येक वृषण पालिका में लगभग 1–3 शुक्रजनक नलिकाएँ होती हैं, जिनमें शुक्राणुओं का निर्माण होता है।

अंडकोश (Scrotum)
- अंडकोश रंजित त्वचा से बनी एक थैलीनुमा संरचना है, जो निचली उदर भित्ति से निकलकर दोनों पैरों के बीच लटकी रहती है।
- यह वृषणों का तापमान शरीर के आंतरिक तापमान से लगभग 2–2.5°C कम बनाए रखने में सहायता करता है, जो शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक है।
- अंडकोश अंदर से एक पेशीय विभाजन सेप्टम स्क्रोटी (Septum Scroti) द्वारा दाएँ और बाएँ अंडकोशीय थैलों में बँटा होता है।
- वृषणों का निर्माण उदर गुहा में होता है, लेकिन बाद में वे इंग्वाइनल कैनाल (Inguinal Canal) से होकर अपने-अपने अंडकोशीय थैलों में उतर जाते हैं।
- शुक्रजनक नलिकाओं के सिरे मिलकर छोटी सीधी नलिकाएँ बनाते हैं, जिन्हें ट्यूब्युली रेक्टी (Tubuli Recti) कहते हैं।
- ट्यूब्युली रेक्टी नलिकाओं के एक जाल में खुलती हैं, जिसे रीटी टेस्टिस (Rete Testis) कहते हैं।
शुक्रजनक नलिकाएँ (Seminiferous Tubules)
प्रत्येक शुक्रजनक नलिका की भीतरी सतह पर मुख्य रूप से दो प्रकार की महत्वपूर्ण कोशिकाएँ पाई जाती हैं:
- सर्टोली कोशिकाएँ (Sertoli Cells)
- नर जनन कोशिकाएँ (Male Germ Cells)
सर्टोली कोशिकाएँ (Sertoli Cells)
- सर्टोली कोशिकाएँ विकसित हो रही जनन कोशिकाओं को पोषण और सहारा प्रदान करती हैं।
- ये शुक्राणु कोशिकाओं के विकास में सहायता करती हैं।
नर जनन कोशिकाएँ (Male Germ Cells)
- नर जनन कोशिकाएँ आगे चलकर शुक्राणुओं (Spermatozoa) का निर्माण करती हैं।
- शुक्राणु निर्माण के दौरान ये विभाजन की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरती हैं।
लेडिग या अंतराली कोशिकाएँ (Leydig or Interstitial Cells)
- शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर के क्षेत्रों को अंतराली स्थान (Interstitial Spaces) कहते हैं।
- इनमें छोटी रक्त वाहिकाएँ और लेडिग कोशिकाएँ (Leydig Cells) पाई जाती हैं।
- लेडिग कोशिकाएँ नर लैंगिक हार्मोन एंड्रोजन (Androgens) का संश्लेषण और स्राव करती हैं।

सहायक नलिका तंत्र (Accessory Duct System)
सहायक नलिकाएँ शुक्राणुओं को वृषण से शरीर के बाहर तक पहुँचाती हैं।
शुक्राणु का मार्ग:
Seminiferous Tubules → Rete Testis → Vasa Efferentia → Epididymis → Vas Deferens → Ejaculatory Duct → Urethra
वासा एफेरेंशिया (Vasa Efferentia)
- शुक्रजनक नलिकाएँ रीटी टेस्टिस के माध्यम से वासा एफेरेंशिया में खुलती हैं।
- वासा एफेरेंशिया शुक्राणुओं को वृषण से एपिडिडिमिस की ओर ले जाती हैं।
एपिडिडिमिस (Epididymis)
- एपिडिडिमिस एक लंबी और अत्यधिक कुंडलित नलिका है, जो प्रत्येक वृषण के पीछे की ओर स्थित होती है।
- यह आगे चलकर वास डिफरेंस (Vas Deferens) के रूप में जारी रहती है।
- यह अपरिपक्व शुक्राणुओं को अस्थायी रूप से संग्रहित करती है।
- एपिडिडिमिस में शुक्राणुओं का शारीरिक परिपक्वन होता है तथा उनकी गतिशीलता और निषेचन क्षमता बढ़ती है।
वास डिफरेंस (Vas Deferens)
- वास डिफरेंस ऊपर की ओर बढ़ते हुए उदर में प्रवेश करती है।
- यह मूत्राशय के ऊपर से गुजरती है।
- यह वीर्य पुटिका (Seminal Vesicle) की नलिका से जुड़कर स्खलन नलिका (Ejaculatory Duct) बनाती है।
मूत्रमार्ग (Urethra)
- पुरुषों में मूत्रमार्ग मूत्र और वीर्य दोनों के लिए एक सामान्य मार्ग प्रदान करता है।
- यह शिश्न से होकर गुजरता है और मूत्रमार्गीय छिद्र (Urethral Meatus) द्वारा बाहर खुलता है।

सहायक ग्रंथियाँ (Accessory Glands)
प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland)
- यह शाहबलूत के आकार (Chestnut-Shaped) की ग्रंथि होती है।
- यह हल्का क्षारीय द्रव स्रावित करती है।
- इसके स्राव में लिपिड, एंजाइम और साइट्रिक अम्ल पाए जाते हैं।
- यह स्राव स्खलन (Ejaculation) के दौरान निकलता है।
- यह योनि के अम्लीय माध्यम को उदासीन करने में सहायता करता है।
- यह शुक्राणुओं को अधिक सक्रिय बनाने में भी सहायता करता है।
वीर्य पुटिकाएँ (Seminal Vesicles)
- वीर्य पुटिकाएँ जोड़ी में पाई जाती हैं और मूत्राशय के पीछे स्थित होती हैं।
- ये म्यूकस और जलीय द्रव का स्राव करती हैं।
- इनके स्राव में फ्रक्टोज (Fructose) होता है, जो शुक्राणुओं के लिए ऊर्जा का स्रोत है।
- इनमें प्रोस्टाग्लैंडिन्स (Prostaglandins) भी पाए जाते हैं।
- एक क्लॉटिंग प्रोटीन स्खलन के बाद अस्थायी थक्का बनाता है।
- वीर्य प्लाज्मा के भाग के रूप में कैल्शियम और कुछ एंजाइम भी पाए जाते हैं।
बल्बोयूरेथ्रल या काउपर ग्रंथियाँ (Bulbourethral or Cowper's Glands)
- ये ग्रंथियाँ मूत्रमार्ग में म्यूकस और क्षारीय द्रव का स्राव करती हैं।
- ये प्रोस्टेट ग्रंथि के नीचे स्थित होती हैं।
- म्यूकस शिश्न के स्नेहन (Lubrication) में सहायता करता है।
- इनका स्राव मूत्रमार्ग में मौजूद मूत्रीय अम्ल को उदासीन करने में भी सहायता करता है।
वीर्य (Semen)
- सहायक जनन ग्रंथियों के स्राव और शुक्राणुओं से मिलकर बनने वाले द्रव को वीर्य (Semen) कहते हैं।
- ये स्राव शुक्राणुओं के परिवहन के लिए माध्यम प्रदान करते हैं।
- ये शुक्राणुओं को पोषण और सक्रियता प्रदान करते हैं तथा उन्हें जीवित और गतिशील बनाए रखने में सहायता करते हैं।
बाह्य जननांग – शिश्न (Penis)
- शिश्न पुरुषों का बाह्य मैथुन अंग (External Copulatory Organ) है।
- इसके अग्र भाग के पास कॉर्पस स्पॉन्जिओसम (Corpus Spongiosum) नामक स्पंजी ऊतक एक मुलायम और संवेदनशील ग्लान्स पेनिस (Glans Penis) बनाता है।
- ग्लान्स पेनिस एक त्वचा से ढका रहता है, जिसे फोरस्किन या प्रीप्यूस (Foreskin/Prepuce) कहते हैं।
- शिश्न में स्तंभनशील ऊतक (Erectile Tissues) और संवहनी स्थान पाए जाते हैं।
- लैंगिक उत्तेजना के दौरान इन स्थानों में रक्त भर जाता है और शिश्न स्तंभित हो जाता है।
मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)
प्राथमिक जनन अंग – अंडाशय (Ovaries)
- अंडाशय मादा के प्राथमिक जनन अंग हैं।
- अंडाशय मादा युग्मक या अंडाणु (Ova) बनाते हैं और स्टेरॉयड हार्मोन का स्राव करते हैं।
- ये उदर के निचले भाग में स्थित होते हैं।
- ये पेरिटोनियम की तहों द्वारा जुड़े रहते हैं, जिन्हें मेसोवेरियम (Mesovarium) कहते हैं।
- प्रत्येक अंडाशय की लंबाई लगभग 2–4 सेमी होती है।
- प्रत्येक अंडाशय एक पतली उपकला से ढका होता है, जिसे ओवेरियन एपिथीलियम (Ovarian Epithelium) कहते हैं।
- अंडाशय में संयोजी ऊतक, रक्त वाहिकाएँ और विकास की विभिन्न अवस्थाओं में फॉलिकल्स पाए जाते हैं।
- अंडाशय बाहरी कॉर्टेक्स (Cortex) और भीतरी मेडुला (Medulla) में विभाजित होता है।
- ओवेरियन कॉर्टेक्स में विकास की विभिन्न अवस्थाओं वाले ओवेरियन फॉलिकल्स पाए जाते हैं।

अंडवाहिनियाँ या फैलोपियन ट्यूब (Oviducts/Fallopian Tubes)
- गर्भाशय के दोनों ओर एक-एक, कुल दो फैलोपियन ट्यूब होती हैं।
- इनकी लंबाई लगभग 10–12 सेमी होती है।
- ये अंडाणु को अंडाशय से गर्भाशय की ओर ले जाती हैं।
- इनकी भीतरी परत सिलियायुक्त (Ciliated) होती है।
फैलोपियन ट्यूब को निम्न भागों में बाँटा जाता है:
इन्फंडिबुलम (Infundibulum)
- यह फैलोपियन ट्यूब का चौड़ा और कीप के आकार का भाग है।
- इसके किनारों पर उंगली जैसी संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें फिम्ब्रिया (Fimbriae) कहते हैं।
एम्पुला (Ampulla)
- यह इन्फंडिबुलम के पास स्थित फैलोपियन ट्यूब का लंबा और चौड़ा भाग है।
- दिए गए नोट्स के अनुसार निषेचन इसी क्षेत्र में होता है।
इस्थमस (Isthmus)
- यह एम्पुला के बाद आने वाला छोटा और संकरा भाग है।
गर्भाशयी भाग (Uterine Part)
- यह गर्भाशय की भित्ति से होकर गुजरता है।
- यह गर्भाशय गुहा से जुड़ा होता है।
गर्भाशय (Uterus)
- गर्भाशय को वूम्ब (Womb) भी कहा जाता है।
- यह लगभग 7.5 सेमी लंबा और लगभग 5 सेमी चौड़ा होता है।
- इसका आकार उल्टी नाशपाती जैसा होता है।
- यह मूत्राशय और मलाशय के बीच स्थित होता है।
गर्भाशय की भित्ति तीन परतों से बनी होती है:
- पेरिमेट्रियम (Perimetrium): गर्भाशय का पतला बाहरी आवरण।
- मायोमेट्रियम (Myometrium): चिकनी पेशियों से बनी मध्य परत। शिशु के जन्म के समय इसमें शक्तिशाली संकुचन होते हैं।
- एंडोमेट्रियम (Endometrium): कई रक्त वाहिकाओं वाली भीतरी ग्रंथिल परत। मासिक धर्म चक्र के दौरान इसमें चक्रीय परिवर्तन होते हैं।

गर्भाशय ग्रीवा (Cervix)
- सर्विक्स गर्भाशय का संकरा निचला भाग है, जो योनि में खुलता है।
- यह म्यूकस के प्लग द्वारा बंद हो सकता है।
वेस्टिबुलर या बार्थोलिन ग्रंथियाँ (Vestibular or Bartholin's Glands)
- योनि के छिद्र के दोनों ओर एक-एक वेस्टिबुलर या बार्थोलिन ग्रंथि पाई जाती है।
- ये छोटी और गोलाकार संरचनाएँ होती हैं।
- ये पुरुषों की काउपर ग्रंथियों के समान होती हैं।
- लैंगिक उत्तेजना के दौरान ये साफ और चिपचिपे द्रव का स्राव करती हैं।
- यह द्रव मैथुन के दौरान स्नेहक (Lubricant) का कार्य करता है।
स्तन ग्रंथियाँ (Mammary Glands)
- स्तन ग्रंथियाँ दोनों लिंगों में पाई जाती हैं, लेकिन मादाओं में क्रियाशील होती हैं।
- स्तन वक्ष की सामने वाली भित्ति पर स्थित जोड़ीदार संरचनाएँ हैं।
- प्रत्येक स्तन में एक निप्पल होता है, जिसके चारों ओर गोलाकार रंजित क्षेत्र होता है, जिसे एरिओला (Areola) कहते हैं।
- प्रत्येक स्तन का ग्रंथिल ऊतक लगभग 15–20 स्तन पालियों (Mammary Lobes) में विभाजित होता है।
- प्रत्येक पाली में एल्विओलाई (Alveoli) के समूह होते हैं।
- एल्विओलाई दूध का स्राव करते हैं।
- प्रत्येक पाली की छोटी नलिकाएँ मिलकर स्तन नलिकाएँ (Mammary Ducts) बनाती हैं।
- स्तन नलिकाएँ चौड़ी होकर लैक्टिफेरस साइनस (Lactiferous Sinuses) बनाती हैं।
- अंततः ये नलिकाएँ दूध को निप्पल की ओर ले जाती हैं।

मादा बाह्य जननांग – वल्वा (Vulva)
मादा के बाहरी जननांगों को सामूहिक रूप से वल्वा (Vulva) कहा जाता है।
मॉन्स प्यूबिस (Mons Pubis)
- यह वल्वा की सबसे आगे स्थित संरचना है।
- यह त्वचा और जघन बालों (Pubic Hair) से ढकी होती है।
लेबिया मेजोरा (Labia Majora)
- ये त्वचा की दो लंबवत तहें हैं, जो वल्वा की बाहरी सीमा बनाती हैं।
लेबिया मिनोरा (Labia Minora)
- ये लेबिया मेजोरा के अंदर स्थित त्वचा की दो अतिरिक्त तहें हैं।
- लेबिया मेजोरा और लेबिया मिनोरा योनि तथा मूत्रमार्ग के छिद्रों की सुरक्षा करती हैं।
क्लिटोरिस (Clitoris)
- यह एक छोटा स्तंभनशील अंग है।
- यह मूत्रमार्ग के छिद्र के ऊपर लेबिया मिनोरा के ऊपरी मिलन बिंदु पर स्थित होता है।
- यह पुरुष के ग्लान्स पेनिस के समजात (Homologous) होता है।
योनि (Vagina)
- मैथुन के दौरान योनि पुरुष के मैथुन अंग को ग्रहण करती है।
- यह मासिक धर्म के रक्त के बाहर निकलने का मार्ग है।
- प्रसव के दौरान यह जन्म नाल (Birth Canal) के रूप में भी कार्य करती है।
हाइमन (Hymen)
- हाइमन एक पतली श्लेष्मिक झिल्ली है, जो योनि के छिद्र को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक सकती है।
युग्मकजनन (Gametogenesis)
युग्मकजनन (Gametogenesis) जनन ग्रंथियों में अविभेदित द्विगुणित जनन कोशिकाओं से अगुणित युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया है।
यह दो प्रकार का होता है:
- शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) – पुरुषों में
- अंडजनन (Oogenesis) – महिलाओं में
शुक्राणुजनन (Spermatogenesis)
शुक्राणुजनन वृषणों में शुक्राणुओं (Spermatozoa/Sperms) के निर्माण की प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया यौवनारंभ से शुरू होती है।
इसके मुख्य चरण हैं:
- गुणन अवस्था (Multiplication Phase)
- वृद्धि अवस्था (Growth Phase)
- परिपक्वन अवस्था (Maturation Phase)
- विभेदन अवस्था (Differentiation Phase)
1. गुणन अवस्था
- शुक्रजनक नलिकाओं में मौजूद अविभेदित जनन कोशिकाओं को स्पर्मेटोगोनिया (Spermatogonia) कहते हैं।
- ये बार-बार समसूत्री विभाजन करके अपनी संख्या बढ़ाती हैं।
2. वृद्धि अवस्था
- स्पर्मेटोगोनिया वृद्धि करके स्पर्मेटोसाइट्स (Spermatocytes) बनाते हैं।
- प्रत्येक स्पर्मेटोगोनियम द्विगुणित होता है और इसमें 46 गुणसूत्र होते हैं।
3. परिपक्वन अवस्था
- प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट्स (Primary Spermatocytes) अर्धसूत्री विभाजन करते हैं।
- एक प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट प्रथम अर्धसूत्री विभाजन करके दो द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट्स बनाता है।
- द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट्स दूसरा अर्धसूत्री विभाजन करके स्पर्मेटिड्स (Spermatids) बनाते हैं।
4. विभेदन अवस्था
- स्पर्मेटिड्स जिस प्रक्रिया द्वारा शुक्राणुओं में बदलते हैं, उसे स्पर्मियोजेनेसिस (Spermiogenesis) कहते हैं।
- विकसित हो रही शुक्राणु कोशिकाएँ सहारे और पोषण के लिए सर्टोली कोशिकाओं से जुड़ी रहती हैं।
- स्पर्मियोजेनेसिस के बाद शुक्राणुओं को शुक्रजनक नलिकाओं से मुक्त करने की प्रक्रिया को स्पर्मिएशन (Spermiation) कहते हैं।

क्रम:
Spermatogonium (2n) → Primary Spermatocyte (2n) → Secondary Spermatocytes (n) → Spermatids (n) → Spermatozoa (n)
शुक्राणुजनन के लिए आवश्यक हार्मोन
- शुक्राणुजनन की शुरुआत गोनैडोट्रॉपिन रिलीजिंग हार्मोन (Gonadotropin Releasing Hormone – GnRH) के स्राव में वृद्धि के कारण होती है।
- GnRH अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior Pituitary) पर कार्य करके गोनैडोट्रॉपिन के स्राव को उत्तेजित करता है।
- दो प्रमुख गोनैडोट्रॉपिन LH और FSH हैं।
- LH लेडिग कोशिकाओं पर कार्य करता है और एंड्रोजन के संश्लेषण तथा स्राव को उत्तेजित करता है।
- FSH सर्टोली कोशिकाओं पर कार्य करता है और उन कारकों के स्राव को उत्तेजित करता है जो स्पर्मियोजेनेसिस में सहायता करते हैं।
शुक्राणु की संरचना (Structure of Sperm)
एक परिपक्व शुक्राणु (Spermatozoan) एक सूक्ष्म और टैडपोल जैसी आकृति वाली कोशिका है। प्लाज्मा झिल्ली पूरे शुक्राणु को ढकती है।
शुक्राणु के चार मुख्य भाग होते हैं:
- शीर्ष (Head)
- ग्रीवा (Neck)
- मध्य भाग (Middle Piece)
- पूँछ (Tail)
शीर्ष (Head)
- शीर्ष में एक अगुणित केंद्रक (Haploid Nucleus) होता है।
- इसके अग्र भाग में एक्रोसोम (Acrosome) होता है।
- एक्रोसोम में ऐसे एंजाइम होते हैं, जो निषेचन के दौरान शुक्राणु की सहायता करते हैं।
ग्रीवा (Neck)
- ग्रीवा छोटी होती है और इसमें दो सेंट्रिओल पाए जाते हैं।
- इन्हें प्रॉक्सिमल सेंट्रिओल (Proximal Centriole) और डिस्टल सेंट्रिओल (Distal Centriole) कहते हैं।
- प्रॉक्सिमल सेंट्रिओल युग्मनज के प्रथम विदलन (First Cleavage) में भूमिका निभाता है।
- डिस्टल सेंट्रिओल शुक्राणु के अक्षीय तंतु (Axial Filament) का निर्माण करता है।
मध्य भाग (Middle Piece)
- यह बेलनाकार होता है और इसे शुक्राणु का पावरहाउस (Powerhouse of Sperm) कहा जाता है।
- इसमें बड़ी संख्या में माइटोकॉन्ड्रिया पाए जाते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया शुक्राणु की गति के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
पूँछ (Tail)
- पूँछ लंबी, पतली और सिरे की ओर संकरी होती है।
- अक्षीय तंतु मध्य भाग और पूँछ से होकर गुजरता है।
- पूँछ की गति शुक्राणु को तैरने में सहायता करती है।

अंडजनन (Oogenesis)
अंडजनन (Oogenesis) परिपक्व मादा युग्मक या अंडाणु के निर्माण की प्रक्रिया है।
इसके तीन मुख्य चरण होते हैं:
- गुणन अवस्था (Multiplication Phase)
- वृद्धि अवस्था (Growth Phase)
- परिपक्वन अवस्था (Maturation Phase)
1. गुणन अवस्था
- जनन उपकला (Germinal Epithelium) की कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन करके ऊगोनिया (Oogonia) नामक जनन कोशिकाएँ बनाती हैं।
- ऊगोनिया समसूत्री विभाजन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाती हैं।
- कुछ ऊगोनिया अर्धसूत्री विभाजन में प्रवेश करके प्राथमिक अंडाणु कोशिकाएँ (Primary Oocytes) बनाती हैं।
2. वृद्धि अवस्था
- एक प्राथमिक अंडाणु कोशिका ग्रैनुलोसा कोशिकाओं की एक परत से घिर जाती है और प्राथमिक फॉलिकल (Primary Follicle) बनाती है।
- प्राथमिक फॉलिकल ग्रैनुलोसा कोशिकाओं की और अधिक परतों से घिरकर द्वितीयक फॉलिकल (Secondary Follicle) बनाते हैं।
3. परिपक्वन अवस्था
- द्वितीयक फॉलिकल आगे विकसित होकर तृतीयक फॉलिकल (Tertiary Follicle) बनाता है।
- तृतीयक फॉलिकल में द्रव से भरी गुहा होती है, जिसे एंट्रम (Antrum) कहते हैं।
- प्राथमिक अंडाणु कोशिका अपना पहला अर्धसूत्री विभाजन पूरा करके एक द्वितीयक अंडाणु कोशिका (Secondary Oocyte) और प्रथम ध्रुवीय पिंड (First Polar Body) बनाती है।
- तृतीयक फॉलिकल आगे विकसित होकर परिपक्व ग्राफियन फॉलिकल (Graafian Follicle) बनाता है।
- द्वितीयक अंडाणु कोशिका के चारों ओर जोना पेल्यूसिडा (Zona Pellucida) नामक झिल्ली विकसित होती है।
- ग्राफियन फॉलिकल फटता है और द्वितीयक अंडाणु कोशिका को मुक्त करता है।
- इस प्रक्रिया को अंडोत्सर्जन (Ovulation) कहते हैं।

क्रम:
Oogonium (2n) → Primary Oocyte (2n) → Secondary Oocyte (n) + First Polar Body → Ovum (n)
अंडाणु (Ovum)
- अंडाणु एक गोलाकार और गतिहीन कोशिका है।
- मनुष्य में अंडाणु पीतक-रहित या एलेसिथल (Alecithal) होता है।
- इसमें प्रचुर मात्रा में कोशिकाद्रव्य होता है, जिसे ऊप्लाज्म (Ooplasm) कहते हैं।
- इसमें स्पष्ट न्यूक्लियोलस वाला एक बड़ा केंद्रक पाया जाता है।
मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle)
मादा प्राइमेट्स जैसे बंदर, एप्स और मनुष्यों में पाए जाने वाले जनन चक्र को मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) कहा जाता है।
- यौवनारंभ पर होने वाले पहले मासिक धर्म को रजोदर्शन (Menarche) कहते हैं।
- दिए गए नोट्स के अनुसार मासिक धर्म औसतन लगभग 28–29 दिनों के अंतराल पर दोहराया जाता है।
- लगभग 45–50 वर्ष की आयु में मासिक धर्म चक्र बंद हो जाता है। इस अवस्था को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं।
मासिक धर्म चक्र की चार अवस्थाएँ होती हैं:
- मासिक धर्म अवस्था (Menstrual Phase)
- फॉलिक्यूलर या प्रोलिफेरेटिव अवस्था (Follicular/Proliferative Phase)
- अंडोत्सर्जन अवस्था (Ovulatory Phase)
- ल्यूटियल अवस्था (Luteal Phase)
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