Chapter 5

Molecular Basis of Inheritance

  • BoardJAC
  • Class12th (SCI.)
  • SubjectBiology
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अध्याय 5: वंशागति का आणविक आधार (Molecular Basis of Inheritance)

1. DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल)

  • DNA का पूरा नाम डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid) है।
  • DNA नाभिक में पाया जाने वाला एक अम्लीय पदार्थ है।
  • इसकी पहचान सबसे पहले फ्रेडरिक मीशर (Friedrich Miescher) ने 1869 में की थी। उन्होंने इसे न्यूक्लिन (Nuclein) नाम दिया।
  • DNA एक पॉलीन्यूक्लियोटाइड (Polynucleotide) है, जो डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड्स से बना होता है।

2. DNA के घटक (Components of DNA)

एक DNA न्यूक्लियोटाइड के तीन घटक होते हैं:

  1. नाइट्रोजनी क्षार (Nitrogenous Base) – एडेनिन (A), ग्वानिन (G), साइटोसिन (C) और थाइमिन (T)
  2. डीऑक्सीराइबोज शर्करा (Deoxyribose Sugar) – एक पेंटोज शर्करा
  3. फॉस्फेट समूह (Phosphate Group)

मानव के अगुणित DNA में लगभग 3.6 × 109 बेस युग्म होते हैं, जबकि E. coli में लगभग 4.6 × 106 बेस युग्म होते हैं।

3. आनुवंशिक पदार्थ (Genetic Material)

आनुवंशिक पदार्थ वह पदार्थ है जो एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में लक्षणों की वंशागति को नियंत्रित करता है।

आनुवंशिक पदार्थ के गुण (Properties of Genetic Material)

  • यह स्वयं की प्रतिकृति (Replication) बनाने में सक्षम होना चाहिए।
  • यह रासायनिक और संरचनात्मक रूप से स्थिर होना चाहिए।
  • इसमें विकास (Evolution) के लिए आवश्यक धीमे परिवर्तनों की संभावना होनी चाहिए।
  • यह मेंडेलियन लक्षणों (Mendelian Characters) के रूप में स्वयं को व्यक्त करने में सक्षम होना चाहिए।

4. आनुवंशिक पदार्थ की खोज (Search for Genetic Material)

ग्रिफिथ का रूपांतरण सिद्धांत (Griffith's Transforming Principle)

फ्रेडरिक ग्रिफिथ (Frederick Griffith) ने 1928 में Streptococcus pneumoniae के दो स्ट्रेन का उपयोग करके एक प्रयोग किया।

  • R-स्ट्रेन: गैर-विषाणुजनक (Non-Virulent) और गैर-विषैला।
  • S-स्ट्रेन: विषाणुजनक (Virulent)। इसकी कोशिका भित्ति में पॉलीसैकराइड आवरण होता है।

ग्रिफिथ ने निम्नलिखित प्रयोग किए:

  1. जीवित R-स्ट्रेन को चूहों में इंजेक्ट किया → चूहे जीवित रहे।
  2. जीवित S-स्ट्रेन को चूहों में इंजेक्ट किया → चूहों की मृत्यु हो गई।
  3. ऊष्मा द्वारा मारे गए S-स्ट्रेन को चूहों में इंजेक्ट किया → चूहे जीवित रहे।
  4. ऊष्मा द्वारा मारे गए S-स्ट्रेन + जीवित R-स्ट्रेन को चूहों में इंजेक्ट किया → चूहों की मृत्यु हो गई।

ग्रिफिथ ने निष्कर्ष निकाला कि ऊष्मा द्वारा मारे गए S-स्ट्रेन से किसी पदार्थ ने गैर-विषाणुजनक R-स्ट्रेन को विषाणुजनक रूप में बदल दिया। उन्होंने इसे रूपांतरण सिद्धांत (Transforming Principle) कहा।

griffith-transforming-principle-updated

5. रूपांतरण सिद्धांत का जैव-रासायनिक अभिलक्षण (Biochemical Characterisation of Transforming Principle)

ओसवाल्ड एवरी (Oswald Avery), कॉलिन मैकलियोड (Colin MacLeod) और मैकलिन मैकार्टी (Maclyn McCarty) ने रूपांतरण सिद्धांत की प्रकृति का अध्ययन किया।

उन्होंने प्रोटीन, RNA और DNA को संभावित आनुवंशिक पदार्थ माना और निम्नलिखित का उपयोग किया:

  • प्रोटीन को पचाने के लिए प्रोटीएज (Protease)
  • RNA को पचाने के लिए RNase
  • DNA को पचाने के लिए DNase

प्रोटीन या RNA को नष्ट करने पर भी रूपांतरण जारी रहा, लेकिन DNA को नष्ट करने पर रूपांतरण नहीं हुआ।

निष्कर्ष: DNA रूपांतरण के लिए उत्तरदायी वंशानुगत पदार्थ है।

6. हर्शे और चेज़ प्रयोग (Hershey and Chase Experiment)

हर्शे और चेज़ ने T2 बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) का उपयोग करके प्रयोग किया।

DNA में फॉस्फोरस होता है लेकिन सल्फर नहीं होता, जबकि प्रोटीन में सल्फर होता है। इसलिए:

  • DNA को रेडियोधर्मी फॉस्फोरस (32P) से चिह्नित किया गया।
  • प्रोटीन को रेडियोधर्मी सल्फर (35S) से चिह्नित किया गया।

इस प्रयोग के तीन प्रमुख चरण थे:

  1. संक्रमण (Infection): चिह्नित फेज को E. coli को संक्रमित करने दिया गया।
  2. ब्लेंडिंग (Blending): विषाणु कणों को अलग करने के लिए जीवाणु कोशिकाओं को तेजी से हिलाया गया।
  3. अपकेंद्रण (Centrifugation): फेज कणों को जीवाणु कोशिकाओं से अलग किया गया।

प्रयोग से पता चला कि DNA जीवाणु कोशिकाओं के अंदर प्रवेश कर गया, जबकि अधिकांश प्रोटीन बाहर ही रहा।

निष्कर्ष: DNA वह आनुवंशिक पदार्थ है जो विषाणु से जीवाणु में स्थानांतरित होता है।

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7. पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला की संरचना (Structure of a Polynucleotide Chain)

एक न्यूक्लियोटाइड में निम्नलिखित होते हैं:

  • एक नाइट्रोजनी क्षार (Nitrogenous Base)
  • एक पेंटोज शर्करा (Pentose Sugar)
  • एक फॉस्फेट समूह (Phosphate Group)

पेंटोज शर्कराएँ (Pentose Sugars)

  • राइबोज (Ribose): RNA में पाई जाती है।
  • डीऑक्सीराइबोज (Deoxyribose): DNA में पाई जाती है।

नाइट्रोजनी क्षार (Nitrogenous Bases)

नाइट्रोजनी क्षार दो प्रकार के होते हैं:

  • प्यूरीन (Purines): एडेनिन और ग्वानिन
  • पाइरिमिडीन (Pyrimidines): साइटोसिन, यूरेसिल और थाइमिन

साइटोसिन DNA और RNA दोनों में पाया जाता है। थाइमिन DNA में पाया जाता है, जबकि यूरेसिल RNA में पाया जाता है।

न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड (Nucleoside and Nucleotide)

न्यूक्लियोसाइड = नाइट्रोजनी क्षार + पेंटोज शर्करा

न्यूक्लियोटाइड = न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट समूह

न्यूक्लियोटाइड 3′–5′ फॉस्फोडाइएस्टर बंधों (Phosphodiester Linkages) द्वारा जुड़कर पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला बनाते हैं।

शर्करा और फॉस्फेट समूह पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला की आधार संरचना (Backbone) बनाते हैं।

8. DNA की संरचना से संबंधित खोजें

  • फ्रेडरिक मीशर (Friedrich Miescher, 1869): उन्होंने नाभिक में DNA को एक अम्लीय पदार्थ के रूप में पहचाना और इसे न्यूक्लिन (Nuclein) नाम दिया।
  • लेवेन (Levene, 1910): उन्होंने DNA के घटकों का वर्णन किया, जिनमें फॉस्फोरिक अम्ल और डीऑक्सीराइबोज शर्करा शामिल हैं।
  • एर्विन चारगाफ (Erwin Chargaff, 1950): उन्होंने चारगाफ का नियम (Chargaff's Rule) प्रस्तुत किया।
  • वॉटसन और क्रिक (Watson and Crick, 1953): उन्होंने मॉरिस विल्किंस (Maurice Wilkins) और रोज़ालिंड फ्रैंकलिन (Rosalind Franklin) द्वारा प्राप्त X-ray diffraction डेटा के आधार पर DNA का द्विकुंडलिनी मॉडल (Double-Helical Model) प्रस्तावित किया।

9. चारगाफ का नियम (Chargaff's Rule)

द्वि-श्रृंखलित DNA में:

  • एडेनिन की मात्रा थाइमिन के बराबर होती है।
  • ग्वानिन की मात्रा साइटोसिन के बराबर होती है।

अतः:

A = T और G = C

10. वॉटसन और क्रिक का DNA मॉडल (Watson and Crick Model of DNA)

  • DNA दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है।
  • शर्करा-फॉस्फेट आधार संरचना (Sugar-Phosphate Backbone) बाहर की ओर होती है और नाइट्रोजनी क्षार अंदर की ओर होते हैं।
  • DNA की दोनों श्रृंखलाएँ विपरीतांतर (Antiparallel) दिशा में चलती हैं।
  • दोनों श्रृंखलाओं के क्षार हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं।
  • एडेनिन, थाइमिन के साथ दो हाइड्रोजन बंधों द्वारा युग्मित होता है।
  • ग्वानिन, साइटोसिन के साथ तीन हाइड्रोजन बंधों द्वारा युग्मित होता है।
  • एक प्यूरीन हमेशा एक पाइरिमिडीन के साथ युग्मित होता है।
  • DNA द्विकुंडलिनी के प्रत्येक चक्कर में लगभग 10 बेस युग्म होते हैं।
  • कुंडलिनी की पिच (Pitch) लगभग 3.4 nm होती है।
  • दो क्रमागत बेस युग्मों के बीच की दूरी लगभग 0.34 nm होती है।

11. DNA की पैकेजिंग (Packaging of DNA)

DNA इस प्रकार व्यवस्थित होता है कि वह कोशिका के छोटे आकार के भीतर समा सके।

प्रोकैरियोट्स में DNA की पैकेजिंग

  • प्रोकैरियोटिक DNA प्रोटीन द्वारा थामे गए लूप्स के रूप में व्यवस्थित होता है।
  • DNA वाले क्षेत्र को न्यूक्लियोइड (Nucleoid) कहते हैं।

यूकेरियोट्स में DNA की पैकेजिंग

  • यूकेरियोटिक DNA नाभिक के अंदर पाया जाता है।
  • DNA धनावेशित हिस्टोन प्रोटीन (Histone Proteins) से जुड़ा होता है।
  • हिस्टोन में लाइसिन (Lysine) और आर्जिनिन (Arginine) प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • DNA एक हिस्टोन ऑक्टामर (Histone Octamer) के चारों ओर लिपटकर न्यूक्लियोसोम (Nucleosome) बनाता है।
  • दो पास-पास स्थित न्यूक्लियोसोम को जोड़ने वाले DNA को लिंकर DNA (Linker DNA) कहते हैं।
  • न्यूक्लियोसोम "धागे पर मोतियों" (Beads-on-a-String) जैसी संरचना के रूप में दिखाई देते हैं।
  • आगे की फोल्डिंग से क्रोमैटिन तंतु (Chromatin Fibres) बनते हैं।

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हेटेरोक्रोमैटिन और यूक्रोमैटिन (Heterochromatin and Euchromatin)

  • हेटेरोक्रोमैटिन (Heterochromatin): गहरे रंग से अभिरंजित, सघन रूप से पैक और अनुलेखन की दृष्टि से निष्क्रिय होता है।
  • यूक्रोमैटिन (Euchromatin): हल्के रंग से अभिरंजित, ढीले रूप से पैक और अनुलेखन की दृष्टि से सक्रिय होता है।

12. RNA विश्व (RNA World)

  • कुछ विषाणुओं में RNA आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करता है।
  • RNA को प्रथम आनुवंशिक पदार्थ माना जाता है।
  • वाल्टर गिल्बर्ट (Walter Gilbert) ने 1986 में RNA World की अवधारणा प्रस्तावित की।
  • RNA आनुवंशिक पदार्थ के साथ-साथ उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में भी कार्य कर सकता है।

DNA को RNA की तुलना में अधिक स्थिर माना जाता है क्योंकि RNA में प्रतिक्रियाशील 2′-OH समूह होता है और DNA में यूरेसिल के स्थान पर थाइमिन पाया जाता है।

13. केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma)

फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) ने 1958 में आणविक जीवविज्ञान का केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma of Molecular Biology) प्रस्तावित किया।

आनुवंशिक सूचना का सामान्य प्रवाह है:

DNA → RNA → Polypeptide

  • DNA → DNA = प्रतिकृति (Replication)
  • DNA → RNA = अनुलेखन (Transcription)
  • RNA → Polypeptide = अनुवादन (Translation)

कुछ RNA विषाणु RNA-निर्भर DNA पॉलीमरेज (RNA-Dependent DNA Polymerase) या रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज (Reverse Transcriptase) की सहायता से RNA टेम्पलेट से DNA का संश्लेषण कर सकते हैं।

central-dogma

14. DNA प्रतिकृति (DNA Replication)

DNA प्रतिकृति वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा DNA स्वयं की एक प्रति बनाता है।

अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति (Semi-Conservative Replication)

प्रतिकृति के दौरान जनकीय DNA की दोनों श्रृंखलाएँ अलग हो जाती हैं। प्रत्येक श्रृंखला नई पूरक श्रृंखला के संश्लेषण के लिए टेम्पलेट का कार्य करती है।

इसलिए प्रत्येक नवगठित DNA अणु में होते हैं:

  • एक जनकीय श्रृंखला
  • एक नव-संश्लेषित श्रृंखला

15. मेसेलसन और स्टाल प्रयोग (Meselson and Stahl Experiment)

मैथ्यू मेसेलसन (Matthew Meselson) और फ्रैंकलिन स्टाल (Franklin Stahl) ने DNA की अर्ध-संरक्षी प्रतिकृति के लिए प्रायोगिक प्रमाण प्रस्तुत किया।

  • E. coli को प्रारंभ में भारी नाइट्रोजन 15N वाले माध्यम में उगाया गया।
  • जीवाणुओं ने 15N को अपने DNA में शामिल कर लिया।
  • इसके बाद जीवाणुओं को हल्के नाइट्रोजन 14N वाले माध्यम में स्थानांतरित किया गया।
  • DNA का विश्लेषण घनत्व-प्रवणता अपकेंद्रण (Density-Gradient Centrifugation) द्वारा किया गया।
  • एक पीढ़ी के बाद DNA ने मध्यवर्ती घनत्व दिखाया।
  • अगली पीढ़ी के बाद हल्के और मध्यवर्ती घनत्व वाले दोनों प्रकार के DNA देखे गए।

इससे DNA प्रतिकृति के अर्ध-संरक्षी मॉडल का समर्थन हुआ।

meselson-stahl-experiment

16. DNA प्रतिकृति के एंजाइम और प्रक्रिया

DNA प्रतिकृति के लिए कई एंजाइमों की आवश्यकता होती है।

  • हेलिकेज (Helicase): DNA श्रृंखलाओं को खोलता और अलग करता है।
  • प्राइमेज (Primase): एक छोटा RNA प्राइमर बनाता है।
  • DNA पॉलीमरेज (DNA Polymerase): न्यूक्लियोटाइड जोड़कर प्राइमर को आगे बढ़ाता है।
  • टोपोआइसोमरेज (Topoisomerase): DNA के खुलने के दौरान उत्पन्न तनाव को कम करने में सहायता करता है।
  • DNA लाइगेज (DNA Ligase): न्यूक्लियोटाइडों के बीच बंध बनाकर DNA खंडों को जोड़ता है।

DNA प्रतिकृति के प्रमुख चरण

  1. प्रतिकृति का उद्गम स्थल (Origin of Replication)
  2. कुंडलिनी का खुलना (Unwinding of the Helix)
  3. प्राइमर का निर्माण (Formation of Primer)
  4. नई श्रृंखला का दीर्घीकरण (Elongation of the New Strand)

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