Chapter 7
Alcohols, Phenols and Ethers
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अध्याय 7 – ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर (Alcohols, Phenols and Ethers)
1. हाइड्रॉक्सी व्युत्पन्न (Hydroxy Derivatives)
वे यौगिक जिनमें हाइड्रॉक्सिल समूह (–OH) उपस्थित होता है, हाइड्रॉक्सी व्युत्पन्न कहलाते हैं।
जिस कार्बन परमाणु से –OH समूह जुड़ा होता है, उसके आधार पर इन्हें मुख्य रूप से निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:
- ऐल्कोहॉलिक (Alcoholic): –OH समूह sp³ संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
- फीनॉलिक (Phenolic): –OH समूह सीधे ऐरोमैटिक वलय के sp² संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।

2. ऐल्कोहॉल का वर्गीकरण (Classification of Alcohols)
–OH समूहों की संख्या के आधार पर
- मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल (Monohydric Alcohol): इसमें एक –OH समूह होता है।
- डाइहाइड्रिक ऐल्कोहॉल (Dihydric Alcohol): इसमें दो –OH समूह होते हैं।
- ट्राइहाइड्रिक ऐल्कोहॉल (Trihydric Alcohol): इसमें तीन –OH समूह होते हैं।
- टेट्राहाइड्रिक ऐल्कोहॉल (Tetrahydric Alcohol): इसमें चार –OH समूह होते हैं।
उदाहरण:
मोनोहाइड्रिक: R–OH
डाइहाइड्रिक: HO–CH₂–CH₂–OH
ट्राइहाइड्रिक: HO–CH₂–CH(OH)–CH₂–OH
प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल
मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल को –OH समूह धारण करने वाले कार्बन परमाणु की प्रकृति के आधार पर आगे वर्गीकृत किया जा सकता है।
प्राथमिक (1°) ऐल्कोहॉल:
R–CH₂–OH
द्वितीयक (2°) ऐल्कोहॉल:
R–CH(OH)–R'
तृतीयक (3°) ऐल्कोहॉल:
R–C(OH)(R')(R'')

3. ऐल्कोहॉल का नामकरण (Nomenclature of Alcohols)
IUPAC नामकरण में संबंधित ऐल्केन के नाम के अंत में आने वाले 'e' को हटाकर –ol प्रत्यय लगाया जाता है।
–OH समूह की स्थिति को एक संख्या द्वारा दर्शाया जाता है।
उदाहरण:
CH₃OH → मेथेनॉल (Methanol)
CH₃CH₂OH → एथेनॉल (Ethanol)
जब –OH मुख्य क्रियात्मक समूह (Principal Functional Group) नहीं होता है, तब hydroxy– उपसर्ग का प्रयोग किया जाता है।
4. ऐल्कोहॉल बनाने की सामान्य विधियाँ (General Methods of Preparation of Alcohols)
4.1 ऐल्किल हैलाइड से
ऐल्किल हैलाइड जलीय KOH के साथ अभिक्रिया करके ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
R–X + KOH(aq) → R–OH + KX
उदाहरण:
CH₃CH₂Cl + KOH(aq) → CH₃CH₂OH + KCl
4.2 ऐल्कीन से – अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन (Acid-Catalysed Hydration)
ऐल्कीन अम्ल की उपस्थिति में जल के साथ अभिक्रिया करके ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
अभिकर्मक (Reagent): H₂O/H⁺ या H₃O⁺
यह अभिक्रिया मार्कोवनीकॉफ नियम (Markovnikov's Rule) का पालन करती है।
यह अभिक्रिया कार्बोकैटायन मध्यवर्ती (Carbocation Intermediate) के माध्यम से होती है।
सामान्य चरण:
- ऐल्कीन का प्रोटोनीकरण (Protonation)।
- कार्बोकैटायन का निर्माण।
- कार्बोकैटायन पर जल का आक्रमण।
- प्रोटॉन के निकलने से ऐल्कोहॉल का निर्माण।

4.3 हाइड्रोबोरेशन–ऑक्सीकरण (Hydroboration–Oxidation)
ऐल्कीन पहले हाइड्रोबोरेशन तथा उसके बाद ऑक्सीकरण द्वारा ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
अभिकर्मक:
1. BH₃ या B₂H₆ / THF
2. H₂O₂ / OH⁻
यह अभिक्रिया एंटी-मार्कोवनीकॉफ योग (Anti-Markovnikov Addition) का पालन करती है।
उदाहरण:
R–CH=CH₂ → R–CH₂–CH₂OH

4.4 ऐल्डिहाइड, कीटोन तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल व्युत्पन्नों से
कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन (Reduction) करके ऐल्कोहॉल बनाए जा सकते हैं।
LiAlH₄ तथा NaBH₄ द्वारा अपचयन
ऐल्डिहाइड (Aldehyde):
R–CHO → R–CH₂OH
ऐल्डिहाइड से प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त होते हैं।
कीटोन (Ketone):
R–CO–R' → R–CH(OH)–R'
कीटोन से द्वितीयक ऐल्कोहॉल प्राप्त होते हैं।
LiAlH₄ एक अधिक प्रबल अपचायक (Reducing Agent) है और यह कई कार्बोक्सिलिक अम्ल व्युत्पन्नों का भी अपचयन कर सकता है।

4.5 ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक से (From Grignard Reagent)
ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करते हैं और उसके बाद जल-अपघटन (Hydrolysis) करने पर ऐल्कोहॉल बनते हैं।
RMgX + O₂ → ROOMgX
जल-अपघटन करने पर ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
कार्बोनिल यौगिकों के साथ ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक की अभिक्रिया
फॉर्मल्डिहाइड के साथ: प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
RMgX + HCHO → RCH₂OMgX → H₃O⁺ → RCH₂OH
ऐल्डिहाइड के साथ: द्वितीयक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
कीटोन के साथ: तृतीयक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।

4.6 एस्टर से (From Esters)
एस्टर जल-अपघटन द्वारा ऐल्कोहॉल बनाते हैं।
क्षारीय जल-अपघटन (Alkaline Hydrolysis)
R–COOR' + NaOH → R–COONa + R'–OH
अम्लीय जल-अपघटन (Acidic Hydrolysis)
R–COOR' + H₂O/H⁺ → R–COOH + R'–OH
5. ऐल्कोहॉल का औद्योगिक निर्माण (Industrial Preparation of Alcohols)
5.1 ऐल्कीन के जलयोजन द्वारा
एथीन का जलयोजन करके एथेनॉल बनाया जा सकता है।
CH₂=CH₂ + H₂O/H⁺ → CH₃CH₂OH
5.2 कार्बोहाइड्रेट के किण्वन द्वारा
यीस्ट (Yeast) जैसे सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति में किण्वन (Fermentation) द्वारा कार्बोहाइड्रेट को एथेनॉल में परिवर्तित किया जा सकता है।
सुक्रोज पहले ग्लूकोज तथा फ्रक्टोज बनाता है।
इसके बाद शर्कराएँ किण्वन द्वारा एथेनॉल तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनाती हैं।
C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂
5.3 वाटर गैस से (From Water Gas)
CO तथा H₂ युक्त वाटर गैस का उपयोग मेथेनॉल बनाने के लिए किया जा सकता है।
CO + 2H₂ → CH₃OH
नोट्स में दिया गया उत्प्रेरक: ZnO + Cr₂O₃।
ऐल्कोहॉल के महत्वपूर्ण प्रकार
विकृत ऐल्कोहॉल (Denatured Alcohol): ऐसा ऐल्कोहॉल जिसे पिरीडीन तथा मेथिल ऐल्कोहॉल जैसे पदार्थ मिलाकर पीने योग्य नहीं रहने दिया जाता है।
परम ऐल्कोहॉल (Absolute Alcohol): अत्यधिक सांद्र एथेनॉल, जिसका उपयोग लगभग जल-मुक्त ऐल्कोहॉल की आवश्यकता वाले कार्यों में किया जाता है।
पावर ऐल्कोहॉल (Power Alcohol): पेट्रोल तथा ऐल्कोहॉल का मिश्रण।
6. ऐल्कोहॉल के भौतिक गुण (Physical Properties of Alcohols)
6.1 भौतिक अवस्था
निम्न सदस्य सामान्यतः रंगहीन द्रव होते हैं, जबकि उच्च सदस्य ठोस हो सकते हैं।
6.2 घनत्व (Density)
कई सामान्य ऐल्कोहॉल का घनत्व जल की तुलना में कम होता है।
6.3 विलेयता (Solubility)
जल में विलेयता निम्नलिखित पर निर्भर करती है:
- ऐल्किल समूह का आकार।
- –OH समूहों की संख्या।
- जल के साथ हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding)।
हाइड्रोकार्बन श्रृंखला बढ़ने पर जल में विलेयता कम होती जाती है।
–OH समूहों की संख्या बढ़ने पर जल में विलेयता बढ़ती है।

6.4 क्वथनांक (Boiling Point)
अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंधन (Intermolecular Hydrogen Bonding) के कारण ऐल्कोहॉल के क्वथनांक अपेक्षाकृत अधिक होते हैं।
लगभग समान आणविक द्रव्यमान वाले यौगिकों के लिए:
Alcohol > Ether क्वथनांक के संदर्भ में।
सामान्यतः –OH समूहों की संख्या बढ़ने के साथ क्वथनांक बढ़ता है।

7. ऐल्कोहॉल के रासायनिक गुण (Chemical Properties of Alcohols)
ऐल्कोहॉल की रासायनिक अभिक्रियाओं को निम्न प्रकार समझा जा सकता है:
- O–H बंध के विदलन से संबंधित अभिक्रियाएँ।
- C–O बंध के विदलन से संबंधित अभिक्रियाएँ।
- –OH समूह से संबंधित अभिक्रियाएँ।
8. O–H बंध के विदलन से संबंधित अभिक्रियाएँ
8.1 ऐल्कोहॉल की अम्लीय प्रकृति
उपयुक्त परिस्थितियों में ऐल्कोहॉल ऑक्सीजन से जुड़े हाइड्रोजन को मुक्त कर सकते हैं।
सोडियम के साथ अभिक्रिया
2R–OH + 2Na → 2R–ONa + H₂↑
सोडियम ऐल्कॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनती है।
NaNH₂ के साथ अभिक्रिया
R–OH + NaNH₂ → R–ONa + NH₃
ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया
ऐल्कोहॉल अपने अम्लीय हाइड्रोजन के कारण ग्रिग्नार्ड अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया करते हैं।
R–OH + R'MgX → R–OMgX + R'H
9. एस्टरीकरण (Esterification)
ऐल्कोहॉल, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके एस्टर बनाता है।
R–OH + R'–COOH ⇌ R'–COOR + H₂O
इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण (Esterification) कहते हैं।

एस्टरीकरण की दर अभिक्रिया करने वाले समूहों के चारों ओर उपस्थित स्थानिक बाधा (Steric Hindrance) पर निर्भर करती है।
10. ऐल्कोहॉल का ऐसिलीकरण एवं बेंज़ॉइलीकरण
ऐसिलीकरण (Acylation)
ऐल्कोहॉल, अम्ल क्लोराइड या अम्ल एनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया करके एस्टर बनाते हैं।
पिरीडीन या किसी अन्य उपयुक्त क्षार का उपयोग किया जा सकता है।
R–OH + R'COCl → R'COOR
बेंज़ॉइलीकरण (Benzoylation)
जिस अभिक्रिया में बेंज़ॉइल समूह का प्रवेश होता है, उसे बेंज़ॉइलीकरण (Benzoylation) कहते हैं।

11. C–O बंध के विदलन से संबंधित अभिक्रियाएँ
उपयुक्त अभिकर्मकों का उपयोग करके ऐल्कोहॉल के –OH समूह को हैलोजन द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
PDF में दर्शाए गए अभिकर्मक:
- HCl / anhydrous ZnCl₂
- PCl₃
- PCl₅
- SOCl₂
सामान्य रूपांतरण:
R–OH → R–X
12. ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण (Dehydration of Alcohols)
ऐल्कोहॉल को सांद्र H₂SO₄ या किसी अन्य उपयुक्त निर्जलीकारक (Dehydrating Agent) के साथ गर्म करने पर ऐल्कीन बनते हैं।
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