Chapter 10

Biomolecules

  • BoardJAC
  • Class12th (SCI.)
  • SubjectChemistry
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जैव-अणु (Biomolecules)

जैव-अणु वे कार्बनिक यौगिक हैं जो जीवित जीवों में पाए जाते हैं। महत्वपूर्ण जैव-अणुओं में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और न्यूक्लिक अम्ल शामिल हैं।

1. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

कार्बोहाइड्रेट को सामान्यतः ऐसे पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन के रूप में परिभाषित किया जाता है, या ऐसे यौगिक जो हाइड्रोलिसिस (Hydrolysis) पर ऐसी इकाइयाँ उत्पन्न करते हैं।

इनमें सामान्यतः कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पाए जाते हैं।

अनेक कार्बोहाइड्रेट का सामान्य सूत्र इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:

Cx(H2O)y

हालाँकि, इस सूत्र वाले सभी यौगिक कार्बोहाइड्रेट नहीं होते और सभी कार्बोहाइड्रेट भी इस सूत्र का पूरी तरह पालन नहीं करते हैं।

2. कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण

कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण हाइड्रोलिसिस के प्रति उनके व्यवहार के आधार पर किया जा सकता है।

2.1 मोनोसैकराइड (Monosaccharides)

वे कार्बोहाइड्रेट जिन्हें हाइड्रोलिसिस द्वारा और सरल कार्बोहाइड्रेट इकाइयों में नहीं तोड़ा जा सकता, मोनोसैकराइड कहलाते हैं।

उदाहरण: ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़।

2.2 ओलिगोसैकराइड (Oligosaccharides)

वे कार्बोहाइड्रेट जो हाइड्रोलिसिस पर दो से दस मोनोसैकराइड इकाइयाँ देते हैं, ओलिगोसैकराइड कहलाते हैं।

मोनोसैकराइड इकाइयों की संख्या के आधार पर इन्हें डाइसैकराइड, ट्राइसैकराइड आदि कहा जाता है।

डाइसैकराइड के उदाहरण:

  • सुक्रोज़ (Sucrose)
  • माल्टोज़ (Maltose)
  • लैक्टोज़ (Lactose)

2.3 पॉलीसैकराइड (Polysaccharides)

वे कार्बोहाइड्रेट जो हाइड्रोलिसिस पर बड़ी संख्या में मोनोसैकराइड इकाइयाँ देते हैं, पॉलीसैकराइड कहलाते हैं।

उदाहरण:

  • स्टार्च (Starch)
  • सेल्यूलोज़ (Cellulose)
  • ग्लाइकोजन (Glycogen)

classification-of-carbohydrates

3. मोनोसैकराइड का वर्गीकरण

मोनोसैकराइड का वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया जाता है:

  • उपस्थित क्रियात्मक समूह (Functional Group) के आधार पर।
  • उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर।

क्रियात्मक समूह के आधार पर

एल्डोज़ (Aldoses): वे मोनोसैकराइड जिनमें ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होता है।

कीटोज़ (Ketoses): वे मोनोसैकराइड जिनमें कीटोन समूह उपस्थित होता है।

कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर

  • 3 कार्बन परमाणु → ट्रायोज़ (Triose)
  • 4 कार्बन परमाणु → टेट्रोज़ (Tetrose)
  • 5 कार्बन परमाणु → पेंटोज़ (Pentose)
  • 6 कार्बन परमाणु → हेक्सोज़ (Hexose)

इस प्रकार, ग्लूकोज़ एक एल्डोहेक्सोज़ (Aldohexose) है, जबकि फ्रक्टोज़ एक कीटोहेक्सोज़ (Ketohexose) है।

4. ग्लूकोज़ (Glucose)

ग्लूकोज़ सबसे महत्वपूर्ण मोनोसैकराइड में से एक है।

इसका आणविक सूत्र है:

C6H12O6

ग्लूकोज़ एक एल्डोहेक्सोज़ है, क्योंकि इसकी खुली-श्रृंखला संरचना में छह कार्बन परमाणु और एक ऐल्डिहाइड समूह होता है।

4.1 ग्लूकोज़ की खुली-श्रृंखला संरचना (Open-Chain Structure)

ग्लूकोज़ की खुली-श्रृंखला संरचना में निम्नलिखित होते हैं:

  • एक ऐल्डिहाइड समूह (–CHO)।
  • पाँच हाइड्रॉक्सिल समूह (–OH)।
  • छह कार्बन परमाणुओं की श्रृंखला।

open-chain-structure-of-glucose

4.2 ग्लूकोज़ की संरचना का समर्थन करने वाली अभिक्रियाएँ

1. हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया:

ग्लूकोज़ हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइम (Oxime) बनाता है, जो कार्बोनिल समूह की उपस्थिति को दर्शाता है।

2. हाइड्रोजन सायनाइड के साथ अभिक्रिया:

ग्लूकोज़ HCN के साथ अभिक्रिया करके सायनोहाइड्रिन (Cyanohydrin) बनाता है, जो कार्बोनिल समूह की उपस्थिति को दर्शाता है।

3. ऑक्सीकरण:

ब्रोमीन जल द्वारा ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण करने पर ग्लूकोनिक एसिड (Gluconic Acid) बनता है। यह ऐल्डिहाइड समूह की उपस्थिति को दर्शाता है।

4. एसीटिलीकरण (Acetylation):

ग्लूकोज़ एसीटिक एनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया करके ग्लूकोज़ पेंटा-एसीटेट (Glucose Pentaacetate) बनाता है, जो पाँच –OH समूहों की उपस्थिति को दर्शाता है।

5. HI के साथ अभिक्रिया:

HI के साथ लंबे समय तक गर्म करने पर ग्लूकोज़ n-हेक्सेन देता है। इससे पता चलता है कि सभी छह कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में व्यवस्थित हैं।

4.3 ग्लूकोज़ की चक्रीय संरचना (Cyclic Structure)

केवल खुली-श्रृंखला संरचना ग्लूकोज़ के सभी गुणों की व्याख्या नहीं कर सकती। ग्लूकोज़ मुख्यतः चक्रीय रूप में पाया जाता है।

C-1 पर उपस्थित –CHO समूह, C-5 पर उपस्थित –OH समूह के साथ अभिक्रिया करके छह-सदस्यीय चक्रीय हेमीऐसीटल (Cyclic Hemiacetal) संरचना बनाता है।

cyclic-structure-of-glucose

4.4 ग्लूकोज़ के α- और β-रूप

ग्लूकोज़ दो चक्रीय रूपों में पाया जाता है:

  • α-D-ग्लूकोज़
  • β-D-ग्लूकोज़

इन दोनों रूपों में अंतर एनोमेरिक कार्बन परमाणु (Anomeric Carbon Atom) से जुड़े –OH समूह की स्थिति में होता है।

alpha-and-beta-glucose

4.5 उत्परिवर्तन घूर्णन (Mutarotation)

किसी प्रकाशिक सक्रिय यौगिक के विशिष्ट घूर्णन (Specific Rotation) में समय के साथ होने वाला परिवर्तन, जब तक कि वह एक स्थिर मान तक न पहुँच जाए, उत्परिवर्तन घूर्णन (Mutarotation) कहलाता है।

α-D-ग्लूकोज़ और β-D-ग्लूकोज़ जलीय विलयन में उत्परिवर्तन घूर्णन दिखाते हैं।

5. फ्रक्टोज़ (Fructose)

फ्रक्टोज़ एक मोनोसैकराइड है, जिसका आणविक सूत्र है:

C6H12O6

यह एक कीटोहेक्सोज़ (Ketohexose) है, क्योंकि इसकी खुली-श्रृंखला संरचना में छह कार्बन परमाणु और एक कीटोन समूह होता है।

5.1 फ्रक्टोज़ की खुली-श्रृंखला संरचना

फ्रक्टोज़ में कार्बोनिल समूह दूसरे कार्बन परमाणु पर उपस्थित होता है।

open-chain-structure-of-fructose

5.2 फ्रक्टोज़ की चक्रीय संरचना

फ्रक्टोज़ भी मुख्यतः चक्रीय रूप में पाया जाता है। इसकी चक्रीय संरचना कार्बोनिल और हाइड्रॉक्सिल समूहों के बीच होने वाली अंतःआण्विक अभिक्रिया (Intramolecular Reaction) से बनती है।

cyclic-structure-of-fructose

6. डाइसैकराइड (Disaccharides)

डाइसैकराइड वे कार्बोहाइड्रेट हैं जो हाइड्रोलिसिस पर दो मोनोसैकराइड इकाइयाँ देते हैं।

दोनों मोनोसैकराइड इकाइयाँ ग्लाइकोसिडिक बंध (Glycosidic Linkage) द्वारा जुड़ी होती हैं।

6.1 सुक्रोज़ (Sucrose)

सुक्रोज़ एक ग्लूकोज़ इकाई और एक फ्रक्टोज़ इकाई से बना होता है।

हाइड्रोलिसिस पर:

Sucrose + H2O → Glucose + Fructose

ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ की इकाइयाँ अपने एनोमेरिक कार्बन परमाणुओं के माध्यम से जुड़ी होती हैं।

इसलिए सुक्रोज़ में कोई मुक्त अपचायक समूह (Free Reducing Group) नहीं होता और यह एक अनअपचायक शर्करा (Non-Reducing Sugar) है।

structure-of-sucrose

6.2 माल्टोज़ (Maltose)

माल्टोज़ दो α-D-ग्लूकोज़ इकाइयों से बना होता है।

हाइड्रोलिसिस पर:

Maltose + H2O → 2 Glucose

दोनों ग्लूकोज़ इकाइयाँ ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं।

माल्टोज़ में एक मुक्त एनोमेरिक कार्बन होता है, इसलिए यह एक अपचायक शर्करा (Reducing Sugar) है।

structure-of-maltose

6.3 लैक्टोज़ (Lactose)

लैक्टोज़ गैलेक्टोज़ और ग्लूकोज़ से बना होता है।

हाइड्रोलिसिस पर:

Lactose + H2O → Galactose + Glucose

लैक्टोज़ एक अपचायक शर्करा (Reducing Sugar) है।

structure-of-lactose

7. अपचायक और अनअपचायक शर्कराएँ (Reducing and Non-Reducing Sugars)

अपचायक शर्कराएँ (Reducing Sugars): वे शर्कराएँ जो फेहलिंग विलयन (Fehling's Solution) या टॉलेंस अभिकर्मक (Tollens' Reagent) का अपचयन कर सकती हैं, अपचायक शर्कराएँ कहलाती हैं।

उदाहरण:

  • ग्लूकोज़
  • फ्रक्टोज़
  • माल्टोज़
  • लैक्टोज़

अनअपचायक शर्करा (Non-Reducing Sugar): सुक्रोज़ एक महत्वपूर्ण अनअपचायक शर्करा है।

8. पॉलीसैकराइड (Polysaccharides)

पॉलीसैकराइड उच्च आणविक द्रव्यमान वाले कार्बोहाइड्रेट हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मोनोसैकराइड इकाइयाँ ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं।

8.1 स्टार्च (Starch)

स्टार्च α-D-ग्लूकोज़ का बहुलक (Polymer) है और पौधों में भोजन के भंडारण के लिए एक महत्वपूर्ण पॉलीसैकराइड है।

यह मुख्यतः दो घटकों से बना होता है:

  • एमाइलोज़ (Amylose)
  • एमाइलोपेक्टिन (Amylopectin)

एमाइलोज़: यह मुख्यतः ग्लूकोज़ इकाइयों की लंबी, अशाखित श्रृंखलाओं से बना होता है।

एमाइलोपेक्टिन: इसकी संरचना शाखित श्रृंखला वाली होती है।

structure-of-starch

8.2 सेल्यूलोज़ (Cellulose)

सेल्यूलोज़ β-D-ग्लूकोज़ का बहुलक है।

इसकी संरचना सीधी श्रृंखला वाली होती है और यह पौधों की कोशिका भित्ति (Cell Wall) का एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक पदार्थ है।

structure-of-cellulose

8.3 ग्लाइकोजन (Glycogen)

ग्लाइकोजन पशुओं में पाया जाने वाला भंडारण पॉलीसैकराइड है।

इसकी संरचना अत्यधिक शाखित होती है और इसे पशु स्टार्च (Animal Starch) भी कहा जाता है।

9. अमीनो अम्ल (Amino Acids)

अमीनो अम्ल वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें अमीनो समूह (–NH₂) और कार्बोक्सिल समूह (–COOH), दोनों उपस्थित होते हैं।

α-अमीनो अम्ल की सामान्य संरचना है:

H₂N–CH(R)–COOH

यहाँ R पार्श्व श्रृंखला (Side Chain) को दर्शाता है।

general-structure-of-amino-acid

9.1 ज़्विटर आयन (Zwitter Ion)

अमीनो अम्ल द्विध्रुवीय आयनों (Dipolar Ions) के रूप में पाए जा सकते हैं, जिनमें धनात्मक और ऋणात्मक दोनों आवेश उपस्थित होते हैं। ऐसे रूप को ज़्विटर आयन (Zwitter Ion) कहा जाता है।

⁺H₃N–CH(R)–COO⁻

zwitterion-structure-of-amino-acid

9.2 अमीनो अम्लों का वर्गीकरण

अमीनो अम्लों को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • उदासीन अमीनो अम्ल (Neutral Amino Acids)
  • अम्लीय अमीनो अम्ल (Acidic Amino Acids)
  • क्षारीय अमीनो अम्ल (Basic Amino Acids)

पोषण के आधार पर इन्हें निम्न प्रकार भी वर्गीकृत किया जाता है:

  • आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids): वे अमीनो अम्ल जिन्हें शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वयं नहीं बना सकता और जिन्हें भोजन से प्राप्त करना आवश्यक होता है।
  • अनावश्यक अमीनो अम्ल (Non-Essential Amino Acids): वे अमीनो अम्ल जिन्हें शरीर स्वयं बना सकता है।

10. प्रोटीन (Proteins)

प्रोटीन उच्च आणविक द्रव्यमान वाले जैव-अणु हैं, जो α-अमीनो अम्लों के बहुलकीकरण (Polymerisation) से बनते हैं।

प्रोटीन में अमीनो अम्ल इकाइयाँ पेप्टाइड बंध (Peptide Bonds) द्वारा जुड़ी होती हैं।

10.1 पेप्टाइड बंध (Peptide Bond)

दो अमीनो अम्लों के बीच बनने वाला –CO–NH– बंध पेप्टाइड बंध कहलाता है।

peptide-bond-formation

दो अमीनो अम्ल मिलकर डाइपेप्टाइड (Dipeptide) बनाते हैं, जबकि अनेक अमीनो अम्ल आपस में जुड़कर पॉलीपेप्टाइड (Polypeptide) बनाते हैं।

10.2 प्रोटीन की संरचना

प्रोटीन की संरचना को विभिन्न स्तरों पर समझा जा सकता है।

प्राथमिक संरचना (Primary Structure)

पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्ल जिस निश्चित क्रम में जुड़े होते हैं, उसे प्राथमिक संरचना कहते हैं।

द्वितीयक संरचना (Secondary Structure)

पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला नियमित संरचनाओं में व्यवस्थित हो सकती है, जैसे:

  • α-हेलिक्स (α-Helix)
  • β-प्लीटेड शीट (β-Pleated Sheet)

primary-secondary-tertiary-protein-structure

तृतीयक संरचना (Tertiary Structure)

पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के समग्र त्रिविम मोड़ (Three-Dimensional Folding) को तृतीयक संरचना कहते हैं।

चतुर्थक संरचना (Quaternary Structure)

कुछ प्रोटीन एक से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से बने होते हैं। इन श्रृंखलाओं की स्थानिक व्यवस्था (Spatial Arrangement) को चतुर्थक संरचना कहते हैं।

10.3 रेशेदार और गोलाकार प्रोटीन (Fibrous and Globular Proteins)

रेशेदार प्रोटीन (Fibrous Proteins): इनमें पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ सामान्यतः लंबी, रेशे जैसी संरचनाओं में व्यवस्थित होती हैं।

गोलाकार प्रोटीन (Globular Proteins): इनमें पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ मुड़कर सघन, लगभग गोलाकार संरचना बनाती हैं।

10.4 प्रोटीन का विकृतीकरण (Denaturation of Proteins)

जब किसी प्रोटीन पर ऊष्मा या रासायनिक पदार्थों जैसे प्रभाव डाले जाते हैं, तो उसकी द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएँ प्रभावित हो सकती हैं और वह अपनी जैविक सक्रियता खो सकता है।

इस प्रक्रिया को प्रोटीन का विकृतीकरण (Denaturation of Proteins) कहते हैं।

इसमें प्राथमिक संरचना सामान्यतः प्रभावित नहीं होती है।

11. विटामिन (Vitamins)

विटामिन वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनकी शरीर की सामान्य वृद्धि और रखरखाव के लिए कम मात्रा में आवश्यकता होती है।

11.1 विटामिनों का वर्गीकरण

विटामिनों को मुख्य रूप से निम्न दो वर्गों में बाँटा जाता है:

वसा में विलेय विटामिन (Fat-Soluble Vitamins):

  • Vitamin A
  • Vitamin D
  • Vitamin E
  • Vitamin K

जल में विलेय विटामिन (Water-Soluble Vitamins):

  • Vitamin B group
  • Vitamin C

classification-of-vitamins

महत्वपूर्ण विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोग

विटामिनकमी से होने वाला रोग / प्रभाव
Vitamin Aरतौंधी (Night Blindness)
Vitamin B₁बेरी-बेरी (Beri-Beri)
Vitamin B₁₂पर्निशियस एनीमिया (Pernicious Anaemia)
Vitamin Cस्कर्वी (Scurvy)
Vitamin Dरिकेट्स (Rickets)
Vitamin Kरक्तस्राव की प्रवृत्ति बढ़ना / रक्त का थक्का बनने में देरी

12. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acids)

न्यूक्लिक अम्ल महत्वपूर्ण जैव-अणु हैं, जो आनुवंशिक जानकारी (Genetic Information) के भंडारण और उसके संचरण के लिए उत्तरदायी होते हैं।

इसके दो प्रमुख प्रकार हैं:

  • DNA – Deoxyribonucleic Acid
  • RNA – Ribonucleic Acid

13. न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड (Nucleosides and Nucleotides)

न्यूक्लिक अम्ल, न्यूक्लियोटाइड नामक इकाइयों से बने होते हैं।

एक न्यूक्लियोटाइड में निम्न तीन घटक होते हैं:

  • एक नाइट्रोजनी क्षारक (Nitrogenous Base)
  • एक पेंटोज़ शर्करा (Pentose Sugar)
  • एक फॉस्फेट समूह (Phosphate Group)

Nucleoside = Nitrogenous Base + Sugar

Nucleotide = Nitrogenous Base + Sugar + Phosphate Group

13.1 नाइट्रोजनी क्षारक (Nitrogenous Bases)

नाइट्रोजनी क्षारकों को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

प्यूरीन (Purines):

  • एडेनिन (Adenine – A)
  • ग्वानिन (Guanine – G)

पाइरिमिडीन (Pyrimidines):

  • साइटोसिन (Cytosine – C)
  • थाइमिन (Thymine – T)
  • यूरैसिल (Uracil – U)

थाइमिन मुख्यतः DNA में पाया जाता है, जबकि यूरैसिल RNA में पाया जाता है।

purine-and-pyrimidine-bases

14. DNA और RNA

DNA: इसमें डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा (Deoxyribose Sugar) होती है और यह आनुवंशिक जानकारी को संग्रहीत करता है।

RNA: इसमें राइबोज़ शर्करा (Ribose Sugar) होती है और यह प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

DNARNA
इसमें डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा होती हैइसमें राइबोज़ शर्करा होती है
इसमें A, G, C और T पाए जाते हैंइसमें A, G, C और U पाए जाते हैं
इसमें थाइमिन होता हैइसमें यूरैसिल होता है

structure-of-dna-and-rna

15. याद रखने योग्य मुख्य बिंदु (Key Points to Remember)

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