Chapter 1
Chapter 1 Relations and Functions
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संबंध एवं फलन – संपूर्ण नोट्स
1. संबंध (Relations)
माना A और B दो अरिक्त समुच्चय हैं। कार्तीय गुणनफल (Cartesian Product) A × B के किसी भी उपसमुच्चय को A से B में एक संबंध (Relation) कहते हैं।
यदि R, A से B में एक संबंध है, तो:
R ⊆ A × B
यदि संबंध R, समुच्चय A पर परिभाषित है, तो:
R ⊆ A × A
उदाहरण:
माना A = {1, 2, 3} तथा संबंध R को a < b द्वारा परिभाषित किया गया है।
तब:
R = {(1, 2), (1, 3), (2, 3)}
यदि संबंध a > b द्वारा परिभाषित हो, तो:
R = {(2, 1), (3, 1), (3, 2)}
2. संबंध का प्रांत एवं परिसर (Domain and Range of a Relation)
किसी संबंध R में उपस्थित सभी क्रमित युग्मों के प्रथम अवयवों के समुच्चय को उसका प्रांत (Domain) कहते हैं।
सभी क्रमित युग्मों के द्वितीय अवयवों के समुच्चय को उसका परिसर (Range) कहते हैं।
उदाहरण:
यदि R = {(1, 2), (2, 3), (3, 4)}, तो:
- प्रांत = {1, 2, 3}
- परिसर = {2, 3, 4}
3. संबंधों की संख्या (Number of Relations)
माना A और B दो परिमित समुच्चय हैं, जिनमें क्रमशः m तथा n अवयव हैं।
अर्थात्:
n(A) = m तथा n(B) = n
तब कार्तीय गुणनफल में कुल अवयव:
n(A × B) = mn
अतः A से B में कुल संभव संबंधों की संख्या:
2^(mn)
यदि समुच्चय A में m अवयव हैं, तो A पर कुल संबंधों की संख्या:
2^(m²)
उदाहरण:
यदि n(A) = 2 तथा n(B) = 3, तो:
कुल संबंध = 2^(2 × 3) = 2⁶ = 64
4. संबंधों के प्रकार (Types of Relations)
4.1 स्वतुल्य संबंध (Reflexive Relation)
समुच्चय A पर परिभाषित संबंध R को स्वतुल्य कहते हैं, यदि A का प्रत्येक अवयव स्वयं से संबंधित हो।
अर्थात्:
(a, a) ∈ R, प्रत्येक a ∈ A के लिए।
उदाहरण:
A = {1, 2, 3} तथा R = {(1, 1), (2, 2), (3, 3)} एक स्वतुल्य संबंध है।
4.2 सममित संबंध (Symmetric Relation)
संबंध R को सममित कहते हैं, यदि:
(a, b) ∈ R ⇒ (b, a) ∈ R
अर्थात् यदि a का संबंध b से है, तो b का संबंध भी a से होना चाहिए।
उदाहरण:
R = {(1, 2), (2, 1), (3, 3)} एक सममित संबंध है।
4.3 संक्रामक संबंध (Transitive Relation)
संबंध R को संक्रामक कहते हैं, यदि:
(a, b) ∈ R तथा (b, c) ∈ R ⇒ (a, c) ∈ R
उदाहरण:
R = {(1, 2), (2, 3), (1, 3)} एक संक्रामक संबंध है।
5. तुल्यता संबंध (Equivalence Relation)
किसी समुच्चय A पर परिभाषित संबंध R को तुल्यता संबंध कहते हैं, यदि वह निम्नलिखित तीनों गुणों को संतुष्ट करता हो:
- स्वतुल्य (Reflexive)
- सममित (Symmetric)
- संक्रामक (Transitive)
अर्थात्:
तुल्यता संबंध = स्वतुल्य + सममित + संक्रामक
उदाहरण 1: पुस्तकों के पृष्ठों की संख्या
माना A किसी पुस्तकालय की सभी पुस्तकों का समुच्चय है। संबंध R को इस प्रकार परिभाषित किया गया है:
R = {(x, y) : x तथा y में पृष्ठों की संख्या समान है}
- स्वतुल्य: प्रत्येक पुस्तक में पृष्ठों की संख्या स्वयं के बराबर होती है।
- सममित: यदि पुस्तक x और y में पृष्ठों की संख्या समान है, तो y और x में भी समान होगी।
- संक्रामक: यदि x और y में समान पृष्ठ हैं तथा y और z में समान पृष्ठ हैं, तो x और z में भी समान पृष्ठ होंगे।
अतः R एक तुल्यता संबंध है।
उदाहरण 2: अंतर का सम होना
पूर्णांकों के समुच्चय Z पर संबंध R इस प्रकार परिभाषित है:
R = {(a, b) : a − b एक सम पूर्णांक है}
स्वतुल्य:
a − a = 0, जो सम है। अतः संबंध स्वतुल्य है।
सममित:
यदि a − b सम है, तो b − a = −(a − b) भी सम होगा।
संक्रामक:
यदि a − b तथा b − c सम हैं, तो:
a − c = (a − b) + (b − c)
भी सम होगा।
अतः R एक तुल्यता संबंध है।
उदाहरण 3: अंतर का 4 से विभाज्य होना
पूर्णांकों के समुच्चय Z पर:
R = {(a, b) : a − b, 4 का गुणज है}
स्वतुल्य: a − a = 0, जो 4 से विभाज्य है।
सममित: यदि a − b, 4 से विभाज्य है, तो b − a भी 4 से विभाज्य होगा।
संक्रामक: यदि a − b तथा b − c, 4 से विभाज्य हैं, तो a − c भी 4 से विभाज्य होगा।
अतः R एक तुल्यता संबंध है।
6. संबंध a ≤ b² की जाँच
वास्तविक संख्याओं के समुच्चय R पर संबंध निम्न प्रकार परिभाषित है:
R = {(a, b) : a ≤ b²}
जाँच कीजिए कि यह स्वतुल्य, सममित अथवा संक्रामक है या नहीं।
(i) स्वतुल्य की जाँच:
स्वतुल्य होने के लिए प्रत्येक a ∈ R पर a ≤ a² होना चाहिए।
लेकिन a = 1/2 रखने पर:
1/2 ≤ 1/4
असत्य है। अतः R स्वतुल्य नहीं है।
(ii) सममित की जाँच:
a = 1 तथा b = 2 लेने पर:
1 ≤ 2² सत्य है।
लेकिन:
2 ≤ 1² असत्य है।
अतः R सममित नहीं है।
(iii) संक्रामक की जाँच:
a = 1, b = −1 तथा c = 0 लेने पर:
1 ≤ (−1)² सत्य है।
−1 ≤ 0² भी सत्य है।
लेकिन:
1 ≤ 0² असत्य है।
अतः R संक्रामक भी नहीं है।
7. फलन (Functions)
माना A तथा B दो अरिक्त समुच्चय हैं। A से B में एक संबंध f को फलन कहते हैं, यदि A के प्रत्येक अवयव का B के ठीक एक अवयव से संबंध हो।
इसे इस प्रकार लिखते हैं:
f : A → B
यहाँ:
- A को फलन का प्रांत (Domain) कहते हैं।
- B को फलन का सहप्रांत (Codomain) कहते हैं।
- प्रत्येक x ∈ A के लिए f(x) ∈ B उसका प्रतिबिंब (Image) कहलाता है।
महत्त्वपूर्ण:
- प्रत्येक फलन एक संबंध होता है।
- लेकिन प्रत्येक संबंध फलन नहीं होता।
- फलन में प्रांत के प्रत्येक अवयव का ठीक एक प्रतिबिंब होना आवश्यक है।
8. फलन का प्रांत, सहप्रांत एवं परिसर
यदि f : A → B एक फलन है, तो:
- प्रांत (Domain): समुच्चय A
- सहप्रांत (Codomain): समुच्चय B
- परिसर (Range): फलन द्वारा प्राप्त सभी वास्तविक प्रतिबिंबों का समुच्चय
अतः:
Range ⊆ Codomain
उदाहरण:
माना A = {−2, −1, 0, 1, 2}, B = {0, 1, 2, 3, 4, 5} तथा:
f(x) = x²
तब:
- प्रांत = {−2, −1, 0, 1, 2}
- सहप्रांत = {0, 1, 2, 3, 4, 5}
- परिसर = {0, 1, 4}
9. एकैकी फलन (One-One or Injective Function)
फलन f : A → B को एकैकी कहते हैं, यदि प्रांत के अलग-अलग अवयवों के प्रतिबिंब भी अलग-अलग हों।
गणितीय रूप में:
f(x₁) = f(x₂) ⇒ x₁ = x₂
उदाहरण:
माना:
f : R → R, f(x) = 2x − 1
यदि:
f(x₁) = f(x₂)
तो:
2x₁ − 1 = 2x₂ − 1
2x₁ = 2x₂
x₁ = x₂
अतः f एक एकैकी फलन है।
एकैकी नहीं होने का उदाहरण:
f : R → R, f(x) = x²
क्योंकि:
f(2) = 4 तथा f(−2) = 4
जबकि 2 ≠ −2।
अतः यह फलन एकैकी नहीं है।
10. अनेकैकी फलन (Many-One Function)
किसी फलन को अनेकैकी कहते हैं, यदि प्रांत के दो या अधिक अलग-अलग अवयवों का प्रतिबिंब समान हो।
अर्थात्:
x₁ ≠ x₂ लेकिन f(x₁) = f(x₂)
उदाहरण:
f : R → R, f(x) = x²
क्योंकि:
f(2) = f(−2) = 4
अतः यह अनेकैकी फलन है।
11. आच्छादक फलन (Onto or Surjective Function)
फलन f : A → B को आच्छादक कहते हैं, यदि सहप्रांत B का प्रत्येक अवयव, प्रांत A के कम-से-कम एक अवयव का प्रतिबिंब हो।
अर्थात्:
Range = Codomain
उदाहरण:
f : R → R, f(x) = x³
किसी भी y ∈ R के लिए:
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