Chapter 9
Chapter 9 Differential Equations
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अवकल समीकरण – संपूर्ण नोट्स (Differential Equations)
1. अवकल समीकरण (Differential Equation)
ऐसा समीकरण जिसमें स्वतंत्र चर (Independent Variable), आश्रित चर (Dependent Variable) तथा स्वतंत्र चर के सापेक्ष आश्रित चर के अवकलज (Derivatives) शामिल हों, अवकल समीकरण कहलाता है।
उदाहरण:
- dy/dx = 2x
- d²y/dx² + 3dy/dx + y = 0
- (dy/dx)² + y = x
1.1 अवकल समीकरणों में प्रयुक्त अवकलज
- प्रथम अवकलज (First Derivative): dy/dx या y'
- द्वितीय अवकलज (Second Derivative): d²y/dx² या y''
- तृतीय अवकलज (Third Derivative): d³y/dx³ या y'''
- चतुर्थ अवकलज (Fourth Derivative): d⁴y/dx⁴ या y''''
2. अवकल समीकरण की कोटि (Order of a Differential Equation)
किसी अवकल समीकरण में उपस्थित उच्चतम कोटि के अवकलज की कोटि को उस अवकल समीकरण की कोटि कहते हैं।
उदाहरण:
- dy/dx + y = 0 → कोटि = 1
- d²y/dx² + dy/dx + y = 0 → कोटि = 2
- d³y/dx³ + y = 0 → कोटि = 3
3. अवकल समीकरण की घात (Degree of a Differential Equation)
जब किसी अवकल समीकरण को उसके अवकलजों के बहुपद (Polynomial) के रूप में व्यक्त किया जाता है, तब उसमें उपस्थित उच्चतम कोटि के अवकलज की घात को उस अवकल समीकरण की घात कहते हैं।
घात केवल तभी परिभाषित होती है, जब अवकल समीकरण को अवकलजों के बहुपद के रूप में व्यक्त किया जा सके।
3.1 महत्त्वपूर्ण बिंदु
- कोटि का निर्धारण उच्चतम कोटि के अवकलज से होता है।
- घात का निर्धारण बहुपद रूप में उच्चतम कोटि के अवकलज की घात से होता है।
- यदि अवकलज त्रिकोणमितीय, लघुगणकीय या घातांकीय फलन के अंदर उपस्थित हो और समीकरण को अवकलजों के बहुपद के रूप में व्यक्त न किया जा सके, तो घात परिभाषित नहीं होती।
3.2 कोटि एवं घात पर आधारित उदाहरण
उदाहरण 1:
d⁴y/dx⁴ + sin(y''') = 0
कोटि = 4
घात = परिभाषित नहीं है, क्योंकि एक अवकलज त्रिकोणमितीय फलन के अंदर उपस्थित है।
उदाहरण 2:
y'' + 5 = 0
कोटि = 2
घात = 1
उदाहरण 3:
(d⁵y/dx⁵)⁴ + 3(d²y/dx²) = 0
कोटि = 5
घात = 4
उदाहरण 4:
d²y/dx² + cos(dy/dx) = 0
कोटि = 2
घात = परिभाषित नहीं है।
उदाहरण 5:
(y''')² + (y'')³ + (y')⁴ + 15 = 0
कोटि = 3
घात = 2
उदाहरण 6:
(y''')³ + (y'')² + sin(y') + 1 = 0
कोटि = 3
घात = परिभाषित नहीं है।
4. अवकल समीकरण का हल (Solution of a Differential Equation)
ऐसा फलन जो दिए गए अवकल समीकरण को संतुष्ट करता है, उस अवकल समीकरण का हल कहलाता है।
4.1 व्यापक हल (General Solution)
जिस हल में स्वेच्छ अचर (Arbitrary Constants) उपस्थित हों, उसे व्यापक हल कहते हैं।
सामान्यतः व्यापक हल में स्वतंत्र स्वेच्छ अचरों की संख्या अवकल समीकरण की कोटि के बराबर होती है।
उदाहरण:
y = mx + c
यहाँ m तथा c दो स्वेच्छ अचर हैं।
4.2 विशिष्ट हल (Particular Solution)
व्यापक हल में उपस्थित स्वेच्छ अचरों के निश्चित मान रखकर प्राप्त हल को विशिष्ट हल कहते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि:
y = x² + C
और दी गई शर्त है:
y(0) = 3
तब:
3 = 0 + C
C = 3
अतः विशिष्ट हल होगा:
y = x² + 3
5. अवकल समीकरणों का निर्माण (Formation of Differential Equations)
दिए गए वक्रों के कुल (Family of Curves) में उपस्थित स्वेच्छ अचरों को समाप्त करके अवकल समीकरण बनाया जा सकता है।
5.1 हल करने की विधि
- दिए गए समीकरण में स्वतंत्र स्वेच्छ अचरों की संख्या ज्ञात कीजिए।
- आवश्यकतानुसार दिए गए समीकरण का अवकलन कीजिए।
- मूल समीकरण तथा उसके अवकलजों की सहायता से स्वेच्छ अचरों को समाप्त कीजिए।
- आवश्यक अवकल समीकरण प्राप्त कीजिए।
5.2 उदाहरण: y = Ax
दिया है:
y = Ax
यहाँ A एक स्वेच्छ अचर है।
x के सापेक्ष अवकलन करने पर:
dy/dx = A
दिए गए समीकरण से:
A = y/x
अतः:
dy/dx = y/x
x(dy/dx) − y = 0
यही आवश्यक अवकल समीकरण है।
5.3 उदाहरण: y = mx + c
दिया है:
y = mx + c
इसमें m तथा c दो स्वेच्छ अचर हैं।
अवकलन करने पर:
dy/dx = m
पुनः अवकलन करने पर:
d²y/dx² = 0
अतः आवश्यक अवकल समीकरण है:
d²y/dx² = 0
5.4 उदाहरण: y = x² + 2x + C
दिया है:
y = x² + 2x + C
x के सापेक्ष अवकलन करने पर:
dy/dx = 2x + 2
अतः:
dy/dx − 2x − 2 = 0
5.5 उदाहरण: y = cos x + C
दिया है:
y = cos x + C
अवकलन करने पर:
dy/dx = −sin x
अतः:
dy/dx + sin x = 0
5.6 उदाहरण: xy = log x + C
दिया है:
xy = log x + C
दोनों पक्षों का अवकलन करने पर:
x(dy/dx) + y = 1/x
अतः:
x²(dy/dx) + xy − 1 = 0
5.7 उदाहरण: y = √(a² − x²)
दिया है:
y = √(a² − x²)
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
y² = a² − x²
x² + y² = a²
अवकलन करने पर:
2x + 2y(dy/dx) = 0
अतः:
x + y(dy/dx) = 0
6. वृत्तों के कुल का अवकल समीकरण (Differential Equation of a Family of Circles)
मूलबिंदु को केंद्र मानकर वृत्तों के कुल पर विचार कीजिए:
x² + y² = a²
यहाँ a एक स्वेच्छ अचर है।
अवकलन करने पर:
2x + 2y(dy/dx) = 0
दोनों पक्षों में 2 से भाग देने पर:
x + y(dy/dx) = 0
यही आवश्यक अवकल समीकरण है।
7. दीर्घवृत्तों के कुल का अवकल समीकरण (Differential Equation of a Family of Ellipses)
निम्नलिखित दीर्घवृत्तों के कुल पर विचार कीजिए:
x²/a² + y²/b² = 1
यहाँ a तथा b स्वेच्छ अचर हैं।
अवकलन करने पर:
2x/a² + (2y/b²)(dy/dx) = 0
अतः:
x/a² + (y/b²)(dy/dx) = 0
पुनर्व्यवस्थित करने पर:
y(dy/dx) = −(b²/a²)x
पुनः अवकलन करने पर:
(dy/dx)² + y(d²y/dx²) = −b²/a²
प्रथम अवकलज से:
b²/a² = −y(dy/dx)/x
मान रखने पर:
(dy/dx)² + y(d²y/dx²) = y(dy/dx)/x
दोनों पक्षों में x से गुणा करने पर:
x(dy/dx)² + xy(d²y/dx²) − y(dy/dx) = 0
यही आवश्यक अवकल समीकरण है।
8. परवलयों के कुल का अवकल समीकरण (Differential Equation of a Family of Parabolas)
निम्नलिखित समीकरण पर विचार कीजिए:
y² = 4ax
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